इसके बाद रेलवे विभाग इस परियोजना का काम शुरू कर देगा
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। ढाई सौ करोड़ रुपये की लागत से करीब 16 किलोमीटर लंबी सिलगन से बिरारी दोहरीकरण फ्लाईओवर परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। यह कुछ दिनों में पूर्ण हो जाएगा, इसके बाद रेलवे विभाग इस परियोजना का काम शुरू कर देगा। इस परियोजना में शहर सहित छह गांवों की 28 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है।
रेल ट्रैफिक होने की दशा में ट्रेनों को फ्लाईओवर से होकर दूसरे रेलवे स्टेशन पर आसानी से पहुंचाए जाने को लेकर रेलवे विभाग ने कुछ वर्ष पूर्व सिलगन से बिरारी रेल लाइन दोहरीकरण फ्लाईओवर परियोजना बनाई थी। इस परियोजना में करीब 16 किलोमीटर लंबी दोहरीकरण फ्लाईओवर लाइन बनाया जाना प्रस्तावित है। इसके निर्माण पर ढाई सौ करोड़ से अधिक की लागत तय की गई थी।
यह रेल दोहरीकरण फ्लाईओवर ललितपुर, चंदेरा, रजवारा, बिरारी, सिलगन और सिवनी खुर्द से होकर गुजरना प्रस्तावित है। इसमें करीब 28.453 हेक्टेयर निजी भूमि अधिग्रहण करने के लिए 41.39 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। जुलाई 2022 में इस परियोजना के भूमि अधिग्रहण के लिए शासन ने गजट जारी किया। गजट जारी होने के बाद जिला प्रशासन और रेलवे विभाग ने भूमि अधिग्रहण संबंधी प्रक्रिया प्रारंभ कर दी थी।
अधिग्रहित होने वाली भूमि को लेकर सूचना जारी कर लोगों से आपत्तियां मांगी गई थीं और उनका निस्तारण कर दिया गया था। इसके बाद निजी भूमि अधिग्रहण का काम शुरू हो गया था। जिसके लिए रेलवे विभाग मांग के अनुसार धनराशि भेजता रहा। वहीं परियोजना में कुछ हेक्टेयर भूमि सरकारी विभागों व ग्राम सभा की भी थी जोकि जिलाधिकारी के निर्देश पर पूर्व में ही अधिग्रहित कर ली गई थी।
वर्तमान में भूमि अधिग्रहण का कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है। कुछ काम ही शेष बचा है, जोकि जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद रेलवे विभाग इस परियोजना पर काम शुरू कर देगा। इस योजना के पूर्ण हो जाने के बाद ललितपुर से गुजरे रेल ट्रैक जोकि सर्वाधिक व्यस्त रेल मार्गों में शुमार किया जाता है, उस पर यातायात को सुचारु रखने में काफी मदद मिलेगी।
कॉड लाइन के लिए चल रहा भूमि अधिग्रहण का काम
दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर ललितपुर जंक्शन से सटे दैलवारा से बिरारी तक रेलवे को ज्वांइट करने के लिए 70 करोड़ रुपये की लागत से कॉड लाइन परियोजना तैयार की गई। यह कॉड लाइन दैलवारा से बिरारी तक पांच किलोमीटर लंबी है। इस कॉड लाइन के निर्माण में सरकारी भूमि के साथ निजी भूमि भी अधिग्रहित की जानी है। जिसके लिए रेलवे विभाग ने नौ करोड़ रुपये जारी किए थे। वर्तमान में निजी भूमि का अधिग्रहण कार्य तेजी से किया जा रहा है। जिसके जल्द ही पूर्ण होने की उम्मीद है।
