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बांदा। बुंदेलखंड में दुग्ध उत्पादन और व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए करीब एक दशक पूर्व बुंदेलखंड विकास पैकेज से बांदा में स्थापित की गई मल्टी प्रोडक्ट्स डेयरी प्लांट (दुग्ध डेयरी) की क्षमता में शासन ने कटौती कर दी है। इसकी प्रस्तावित एक लाख लीटर दुग्ध उत्पादन क्षमता को घटाकर मात्र 10 हजार लीटर कर दिया है। इस दुग्ध डेयरी प्लांट की लागत महज 60 करोड़ रुपये रह गई है।

बांदा शहर के नजदीक अतर्रा रोड पर एक अरब तीन करोड़ की लागत वाली दुग्ध डेयरी के लिए सात बीघा भूमि पर स्वीकृत हुई थी। राजकीय निर्माण निगम को इसका निर्माण करना था। दुग्ध डेयरी प्लांट का शिलान्यास प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री ने 11 सितंबर 2019 को मथुरा में शिलापट का अनावरण करके किया था। एक दशक बाद अब इस महत्वपूर्ण योजना में नया बदलाव सामने आया है।

दुग्ध विकास संघ उत्तर प्रदेश से आई विशेषज्ञों की टीम ने इस प्लांट की जांच व जायजा और किसानों, अधिकारियों से बातचीत करने के बाद अपनी रिपोर्ट में कह दिया कि पूरे मंडल में एक लाख लीटर दूध का उत्पादन नहीं रहा। ऐसे में प्रस्तावित प्लांट की क्षमता पर सवाल उठाते हुए एक लाख लीटर क्षमता को खारिज करते हुए मात्र 10 हजार लीटर क्षमता की प्रोसेसिंग यूनिट की मंजूरी दी है। जिसका यहां से नए सिरे से शासन को प्रस्ताव भेजा गया जिसे शासन ने मंजूरी दे दी। शासन ने प्लांट के लिए जारी 100 करोड़ रुपये में 40 करोड़ रुपये वापस ले लिए जाएंगे। नए प्लांट की लागत महज 60 करोड़ रुपये है। अब प्लांट का निर्माण समाज कल्याण निगम करेगा।

प्रोसेसिंग यूनिट बनने से मिलेगा उचित दाम

दुग्ध विकास अधिकारी रामशरण का कहना है कि मंडल में दुग्ध का उत्पादन बहुत कम है। बांदा के नरैनी रोड स्थित दुग्ध डेयरी यूनिट के समाप्त होने के बाद यहां का दूध वाहन से चित्रकूट भेजा जाता है। जो महज एक हजार लीटर ही है। पूरे मंडल में महज पांच हजार लीटर की दूध का उत्पादन हो रहा है। किसानों को दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सरकार ने भी कई योजनाएं चला रखी है। प्रोसेसिंग प्लांट के बनने से किसानों को उचित मूल्य मिलेगा।



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