आटा। बिजली कटौती ने ग्रामीणों की समस्या बढ़ा दी है। खेतों की सिंचाई के लिए किसानों को रात-दिन इंतजार करना पड़ रहा है। भले ही सरकार 18 से 20 घंटे बिजली देने का दावा कर रही हो, लेकिन हकीकत में लोगों को परेशानी से उठानी पड़ रही है। आटा फीडर से जुड़े दो दर्जन गांवों के किसान बिजली की कटौती से परेशान हैं।
फीडर से जुड़े गांवों में सोमवार की रात सात बजे से लेकर रात में तीन बार बिजली कटौती हुई। जिमसें छह घंटे अघोषित हुई। आठ बजे जैसे तैसे बिजली आई। तो उसके बाद नौ बजे फिर चली गई।भोर होने से पहले ही बिजली चार बजे चली गई। रतजगा करते हुए लोग घरों के बाहर छतों पर बिजली का इंतजार करते रहे। पूरी रात करीब छह से सात घंटे कटौती हुई। घरों में लगें इनवर्टर जवाब देने लगे हैं। बिजली न आने से पानी का संकट हो गया है।
आटा निवासी वीरसिंह जगमोहन, हरिओम पाल, राजू साविता, किशोर तिवारी, कन्हैया कुशवाहा, बहादुर पाल आदि का कहना है कि लगातार एक हफ्ते से दिन और रात में बिजली की कटौती की जा रही है। ऐसे नींद के साथ कई काम प्रभावित हो रहें हैं। किसानों ने बताया कि बिजली नहीं आने से खेती भी प्रभावित हो सकती है। अगर समय पर बिजली नहीं मिलेगी तो सिंचाई के लिए रातों को बिजली का इंतजार करना पड़ेगा। आटा में स्थित बिजली उपकेंद्र का सीयूजी नंबर बंद होने से बिजली आने-जाने का उपभोक्ताओं का पता नही चलता है। कई बार इसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों को दी लेकिन अभी तक इस समस्या का हल नही निकल सका।
