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बांदा। मोटे अनाज की बुआई को लेकर कृषि विभाग के दावे व सरकारी क्रय केंद्रों के स्थिति मेल नहीं खा रही है। 10 दिन से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी क्रय केंद्रों में एक दाना ज्वार, बाजरा बिकने को नहीं आया। इधर, अधिकारी क्रय केंद्रों में ज्वार, बाजरा की आवक न होने से परेशान हैं। श्री अन्न योजना सरकारी की प्राथमिकता में है।

कृषि विभाग के रिकार्ड की माने तो चित्रकूटधाम मंडल में श्री अन्न योजना के तहत चारों जनपदों में 70,724 हेक्टेयर में ज्वार व 13,445 हेक्टेयर में बाजरा की बुआई की गई है। कृषि विभाग की रिपोर्ट के आधार पर शासन ने मोटे अनाज की खरीद के लिए खाद्य विभाग को चारों जनपदों में ज्वार के 27 व बाजरा के 16 केंद्र खोलने का लक्ष्य दिया था। खाद्य विभाग ने पहली अक्तूबर को ज्वार के 22 व बाजरा के 13 केंद्र खोल दिए हैं। लेकिन दस दिन बाद भी अन्न का एक दाना नहीं पहुंचा।

ऐसे में मोटे अनाज की बुआई को लेकर या तो कृषि विभाग के दावे गलत है या फिर किसान सरकारी क्रय केंद्रों में मोटा अनाज बेचने नहीं आ रहा। हालांकि कृषि विभाग का कहना है कि अभी फसल खेतों में खड़ी है। अभी ज्वार, बाजार को क्रय केंद्रों तक आने में एक सप्ताह का समय लगेगा।

मंडल में बोया गया ज्वार, बाजरा (हे.)

जनपद ज्वार बाजरा

हमीरपुर 19227 249

महोबा 4386 3

बांदा 24032 3191

चित्रकूट 23079 9997

योग- 70724 13440

इनसेट-

मंडल में खोले गए सरकारी क्रय केंद्र

जनपद ज्वार बाजरा

बांदा 10 8

चित्रकूट 5 5

महोबा 3 0

हमीरपुर 4 0

योग- 22 13

केस-1

पैलानी तहसील के खप्टिहा कला के किसान पवन निषाद का कहना है कि अन्ना पशुओं की वजह से मोटे अनाज की बुआई खाने बस के लिए की है। दिन रात रखवाली करना पड़ती है। कृषि विभाग के रिकार्ड कुछ भी कहें लेकिन मोटे अनाज के आच्छादन रकबे में कोई खास वृद्धि नहीं हुई है।

केस-2

नरैनी तहसील के बड़ैछा के किसान राजकुमार व रतिराम प्रजापति का कहना है कि एक तो बारिश न होने से बुआई नहीं हो पाई। दूसरा अन्ना मवेशियों से फसल नहीं बच पाती है। किसान मजबूरी में एक फसल रबी की लेने को मजबूर है। पशु संरक्षण को लेकर सिर्फ कागजी खानापूरी हो रही है।

मंडल में पिछले साल की तुलना में इस वर्ष ज्वार के रकबे में 10 हजार व बाजरा में एक हजार हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। सितंबर माह में बारिश अधिक हो जाने से ज्वार, बाजरा की फसल पिछड़ गई है। अभी इसे क्रय केंद्रों तक पहुंचने में 10 दिन का समय लगेगा।

विजय कुमार

उप निदेशक कृषि, बांदा



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