बांदा। उत्तर प्रदेश गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम के मामले में तीन भाइयों समेत चार दोषियों को विशेष न्यायाधीश गैंगेस्टर गुणेंद्र प्रकाश की अदालत ने शुक्रवार को पांच-पांच वर्ष के कठिन कारावास की सजा सुनाई। सभी पर सात-सात हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड जमा न करने पर दो दो माह की अतिरिक्त सजा भोगनी होगी।
विशेष लोक अभियोजक सौरभ सिंह ने बताया कि जसपुरा थाना के तत्कालीन एसओ आरवी सिंह द्वारा नौ सितंबर 2009 को थाना जसपुरा में इस आशय की जुबानी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अनुज सिंह पुत्र विशंभर सिंह गांव का एक संगठित गिरोह अनुज सिंह, अनिल सिंह,रविकरन सिंह पुत्र विशंभर सिंह व राजू निषाद पुत्र मलखान, बबलू पुत्र श्रीपाल व थाना सुमेरपुर के भौरा गांव निवासी इसनंदी उर्फ गया प्रसाद पुत्र दर्शन सक्रिय सदस्य हैं।
अनूप सिंह गिरोह का गैंगलीडर है। इनका ग्राम नारायण व आसपास के क्षेत्रों में इतना भय व आतंक व्याप्त है कि इनके आपराधिक मामलों मे जनता गवाह देने के लिए तैयार नहीं होती है। इनके विरुद्ध थाना जसपुरा में सन् 2008 मे हत्या, डकैती व घर में घुसकर अकारण मारपीट के मामले रहे हैं। एसओ ने इनका अपराधिक गैंग चार्ट बनाकर जिला मजिस्ट्रेट के आदेश सात सितंबर 2009 को अनुमोदित कराकर गैंगस्टर एक्ट का मामला दर्ज कराया।
मामले का आरोप पत्र अदालत मे पेश किया। सभी के विरुद्ध न्यायालय में 27 जुलाई 2011 को आरोप बनाया। मामले की सुनवाई के दौरान पांच गवाह पेश किए गए। राजू निषाद व बबलू के विरुद्ध कोई साक्ष्य न होने पर इन्हे दोष मुक्त कर दिया गया। अन्य चार को पांच-पांच साल की सजा सुनाई।
