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टैग- राष्ट्रीय सिनेमा दिवस

संवाद न्यूज एजेंसी

झांसी। एक दौर था जब सिनेमाघरों के बाहर फिल्म देखने के लिए लंबी कतारें लगती थीं। टिकट ब्लैक में बिकती थीं, लेकिन अब मोबाइल और ओटीटी प्लेटफार्म ने सिनेमाघर में फिल्म देखने का क्रेज कम कर दिया है। इसका नुकसान सिनेमाघर संचालकों को भी हो रहा है।

झांसी में भी सिनेमाघरों में जाकर फिल्म देखने का लोगों में खूब क्रेज था। 2001 तक महानगर मेंं 11 सिनेमाघर संचालित होते थे, जिनमें रोजाना आठ हजार से ज्यादा लोग फिल्म देखते थे। इनमें फिल्म को देखने के लिए टिकट की मारामारी ज्यादा रहती थी। लोग सुबह से ही टिकट के लिए लाइन लगाकर खड़े हो जाते थे। लेकिन अब महानगर में महज तीन ही सिनेमाघर संचालित हो रहे हैं। उनमें भी दर्शक नहीं दिखते। सिनेमाघर संचालकों का कहना है कि बदलते युग में मोबाइल, ओटीटी, डीवीडी, सीडी प्लेयर आदि संसाधनों ने सिनेमाघर का क्रेज कम कर दिया। खिलौना टॉकीज के मैनेजर चंद्रप्रकाश के मुताबिक मनोरंजन टैक्स ज्यादा होने से टिकट का पैसा ज्यादा लिया जाता है। जबकि मोबाइल में यह सुविधा कम पैसे में मिलती है। इससे दर्शकों ने सिनेमाघरों से किनारा कर लिया।

ये थे सिनेमाघर

झांसी में 11 सिनेमाघरों में नटराज, खिलौना, इलाइट सिनेमाघर अभी भी संचालित हो रहे हैं। वहीं, डमरू, भूषण, चित्रा, कृष्णा, लास्कला, मिनर्वा, लक्ष्मी, नंदनी अब बंद हो गए हैं।



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