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ललितपुर। जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में ग्रामीण इलाकों की विद्युत आपूर्ति और सिंचाई के लिए पर्याप्त विद्युत आपूर्ति का मुद्दा गरमाया रहा। जिला पंचायत सदस्यों ने विद्युत विभाग में फैल भ्रष्टाचार व लापरवाही के कारण किसानों का शोषण हो रहा है, अध्यक्ष व सदन के सामने पुरजोर तरीके से मामला रखा, बैठक में मौजूद, सांसद व राज्यमंत्री ने तत्काल व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए, सदन के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी ने विद्युत विभाग के अधिकारियों को कार्यप्रणाली में सुधार न लाने के दशा में उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी दी।

जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में विभागों की समीक्षा के दौरान जिला पंचायत सदस्यों ने विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए, उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में किसानों को सिंचाई के लिए विद्युत की आवश्यकता है, लेकिन विद्युत आपूर्ति समय पर न होने के कारण सिंचाई में में परेशानी का मुद्दा उठाया गया। जिस पर जिला पंचायत अध्यक्ष व सांसद ने मौजूद अधिकारियों को तत्काल व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए। जिला पंचायत सदस्य लीलाधर दुबे ने बताया कि बांसी हर्षपुर पाइप पेयजल योजना से 22 गांवों को पेयजल आपूर्ति की जाती है। लेकिन विद्युत आपूर्ति न होने के कारण इस पाइप पेयजल योजना से प्रतिदिन पानी नहीं मिल पा रहा है। साथ ही सदन ने एक सुर में नहरों का संचालन 25 अक्तूबर से करने की मांग उठाई गई। जिस पर मुख्य विकास अधिकारी संभव प्रयास करने का आश्वासन दिया। बैठक के दौरान सांसद अनुराग शर्मा, राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ, जिला पंचायत अध्यक्ष कैलाश निरंजन, सदस्य लीलाधर दुबे, वीरसिंह, अमर सिंह, मनोज कुशवाहा, मुख्य विकास अधिकारी केके पांडेय व अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

विद्युत विभाग के कर्मचारी अवैध धनराशि लेकर दे रहे हैं, कनेक्शन

नलकूप के अस्थाई कनेक्शन के नाम पर लाइन मेन 52 सौ रुपये ले रहे हैं, जबकि उसकी रसीद नहीं दी जा रही है। जिससे चेकिंग के दौरान उन किसानों को विद्युत चोरी की कार्यवाही से गुजरना पड़ता है। साथ ही जनप्रतिनिधियों ने सदन को यह भी अवगत कराया कि अधिकारियों के आदेशों के बाद भी ग्रामीण इलाकों में डीपी नहीं बदली जाती है। जबकि अगर लाइन मैन को दस हजार रुपये दे दिए जाएं, तो दूसरे दिन ही डीपी नई रख दी जाती है। इसके उदाहरण भी स्थान सहित सदन में दिए गए। सीडीओ ने ऐेसे कर्मचारियों को चिहिंत कर कार्यवाही के आदेश दिए।

दिखाई दिया फीलगुड का माहौल

जिला पंचायत की बैठक में अध्यक्ष व सदस्यों के बीच में जो कुछ पहले गतिरोध था, वह इस बैठक में समाप्त दिखाई दिया। बैठक के दौरान विगत बैठक की कार्यवाही पर बिना कोई चर्चा किए पुष्टि कर दी गई। साथ ही सदस्यों ने सभी विभागों के कार्याें की समीक्षा तो कि लेकिन जिला पंचायत के कराए गए, कार्यों की समीक्षा नहीं की गई। इससे मामला शांतिपूर्ण नजर आया।



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