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बांदा। बासमती और परसन की खुशबू कानपुर और दिल्ली के चावल कारोबारियों को खूब भा रही हैं। व्यापारी गांव-गांव जाकर खेतों में खड़ी फसलों की बोली लगा रहे हैं। इतना ही नहीं एडवांस देकर धान बेचने का करार कर रहे हैं।

चित्रकूटधाम मंडल में दो दशक पहले तक सुगंधित धान बासमती, परसन, चिन्नावर की बड़े पैमाने पर खेती होती थी। यहां का चावल दूर-दूर तक भेजा जाता था, लेकिन सिंचाई के अभाव में धीरे-धीरे किसानों ने सुगंधित धान की रोपाई कम कर दी। दूसरा कारण यह भी रहा कि सरकारी क्रय केंद्र पर सुगंधित व पतले धान की खरीद भी मोटे धान के भाव ही होती है। ऐसे में किसान पूरी तरह से आढ़तियों पर निर्भर था। आढ़तिया मनमाने दाम पर धान खरीदते थे। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा था।

पिछले साल दाम अच्छे मिलने से किसानों का रुझान बासमती और परसन की ओर बढ़ा। इस साल 57 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में धान की रोपाई की गई है। इसमें करीब सात हजार हेक्टेयर में सुगंधित धान रोपा गया है। सबसे अधिक बांदा के नरैनी, अतर्रा आदि क्षेत्रों में छह हजार हेक्टेयर से पतला धान रोपित किया गया है। इसकी जानकारी मिलते ही बाहरी चावल कारोबारियों ने यहां डेरा डाल लिया है। गांव-गांव जाकर फसलों की बोली लगा रहे हैं।

दाम अच्छे मिलने से खुश हैं किसान

3500 रुपये क्विंटल बेचा धान

बिलगांव के किसान रामभवन का कहना है कि पांच बीघे में बासमती, परसन धान लगाया था। बाहरी व्यापारियों ने उनसे 3500 रुपये क्विंटल धान बेचने का करार किया है। 10 हजार रुपये एडवांस भी दे दिया है। बाजार लेकर जाते तो 2500 रुपये क्विंटल से अधिक दाम नहीं मिलते।

खुरहंड के किसान शिवम ने बताया कि छह बीघे में सुगंधित बासमती, परसन लगाया है। बाहरी व्यापारी खड़ी फसल का 60 हजार रुपये दे गए हैं। यह धान मड़ाई के बाद उन्हें दिया जाएगा। धान की फसल तैयार होने में 15 दिन शेष हैं। अब नफा नुकसान की जिम्मेदारी व्यापारी की है।

सरकारी क्रय केंद्रों पर मोटे धान की खरीद होती है। किसान को अच्छा समर्थन मूल्य भी सरकार दे रही है। पतले धान के उसे अच्छे दाम मिले रहे हैं, यह अच्छा है। -रामकुमार, संयुक्त कृषि निदेशक, चित्रकूटधाम मंडल, बांदा।



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