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चित्रकूट। कृषि भवन के सभागार में थोक व फुटकर उर्वरक विक्रेताओं की एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला हुई। इसमें सभी से कहा गया कि किसानों को संतुलित मात्रा में उर्वरकों के उपयोग व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिए जाने के लिए प्रेरित करें।

गुरुवार को कार्यशाला में उप कृषि निदेशक राजकुमार ने कार्यशाला में उर्वरक विक्रेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत सरकार की मंशा है कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से देश से बाहर जाने वाली मुद्रा को रोका जा सकेगा है और राष्ट्र के अन्य संसाधनों में वृद्धि होगी।

सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता आरके शुक्ला ने कहा कि साधारण डीएपी, यूरिया के स्थान पर नैनो यूरिया, डीएपी का प्रयोग कर किसान लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

जिला कृषि अधिकारी आरपी शुक्ल ने कहा कि कृषकों को असंतुलित एवं अधिक मात्रा में यूरिया के प्रयोग से होने वाले नुकसान की जानकारी दी जाए। यूरिया व डीएपी के वैकल्पिक उर्वरकों, जैव उर्वरकों के प्रयोग एवं लाभ के बारे में कृषकों को बताकर जागरूक करें ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे।



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