
सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : अमर उजाला
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बांदा जिले में चिता को अग्नि देने से पहले अचानक पार्थिव शरीर के होठ और गाल हिले तो परिजन जीवित होने की आस में शव लेकर जिला अस्पताल पहुंच गए। डॉक्टर ने जांच कर मौत की पुष्टि कर दी। परिजन फिर शव लेकर मुक्तिधाम पहुंचे और अंतिम संस्कार किया।
शहर कोतवाली के शंभू नगर निवासी वृंदावन पाल (75) का बीमारी से शुक्रवार की शाम निधन हो गया था। शनिवार को क्योटरा के मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार की तैयारी हो रही थी। पार्थिव शरीर को चिता पर लिटा दिया गया था। अग्निदाह से पहले अचानक उनके होंठ और गाल हिले।
इस पर परिजनों को उनके जीवित होने का आभास हुआ। फौरन चिता से शरीर उठाकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। डॉक्टर ने बताया कि उनकी मौत पहले ही हो चुकी है। बेटे सुधीर ने बताया कि तीन दिन बुखार के बाद मृत्यु हुई थी। चिता में अचानक हरकत दिखी, तो लगा कि वह जीवित हैं। दोबारा मुक्तिधाम पहुंचकर बड़े बेटे हेमंत ने मुखाग्नि दी।
