चित्रकूट। शरद पूर्णिमा पर्व पर शनिवार को धर्मनगरी में एक लाख श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी नदी मेें सुबह स्नान किया। पंडितों को दान कर भगवान कामदनाथ के दर्शन कर पूजा पाठ किया। चंद्रग्रहण पड़ने के कारण शाम चार बजे से मंदिरों के पट बंद हो गए। जिससे श्रद्धालुओं को परेशानी हुई।
शरद पूर्णिमा पर्व में प्रतिवर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मनगरी पहुंचे। श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी नदी में स्नान कर विधि विधान से पूजा पाठ किया। भगवान कामदनाथ के दर्शन कर पंचकोसीय परिक्रमा लगाई। धर्मनगरी क्षेत्र के जानकीकुंड, गुप्त गोदावरी, अनुसइया आश्रम आदि स्थानों के दर्शन किए। महोबा से आए श्रद्धालु राजेश राजपूत ने बताया कि वह हर साल शरद पूर्णिमा पर्व पर यहां आते हैं। इस बार शाम चार बजे से चंद्रगहण होने के कारण सुबह ही उन्होंने परिक्रमा लगा ली। कामदगिरि प्रमुखद्वार से लेकर सभी मंदिर के कपाट बंद रहे। श्रद्धालुओं ने बाहर से ड्योढ़ी छूकर दर्शन किए।
पर्व पर धर्मनगरी में खीर पकाकर खाने की परंपरा कई साल से चली आ रही है। इस बार चंद्रग्रहण पड़ने के कारण पहले ही श्रद्धालुओं ने तीर्थ स्थानों के परिसरों में खीर बनाकर परिवार के सभी सदस्यों के साथ खाई। वहीं, दमा रोग से पीड़ित मरीजों ने धर्मनगरी में मिलने वाली दवा को खीर में मिलाकर खाई। शहर में आयुर्वेद डॉ. प्रयागनारायण अग्रवाल ने स्टेशन रोड पर आने वाले श्रद्धालुओं को श्वांस की दवा मुफ्त में बांटी।
भागवत पीठ के आचार्य नवलेश दीक्षित ने बताया कि इस बार शरद पूर्णिमा पर्व में चंद्रग्रहण पड़ रहा है। इसमें शाम चार बजे से सूदक शुरू हो गए जबकि चंद्रग्रहण रात्रि 1 बजकर पांच मिनट से शुरू हो रहा है। रात्रि दो बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगा। शरद पूर्णिमा पर्व में चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। इस पर्व के दिन चंद्रगृहण पड़ना अच्छा संयोग नहीं हैं।
