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– अब तक कर्मचारियों की संख्या के आधार पर होता था भुगतान

अमर उजाला ब्यूरोझांसी। खर्च में कटौती और बचत पर उतारू रेलवे ने ट्रेनों की सफाई और पानी भरने के टेंडर की शर्ताें में बदलाव करके 1.75 करोड़ रुपये सालाना की बचत का प्लान तैयार कर लिया है, लेकिन इससे 150 कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। कर्मचारियों को चिंता है कि कम दर पर टेंडर होने के बाद आने वाली नई कंपनी उनके वेतन में कटाैती कर देगी। साथ ही कर्मचारियों की संख्या भी कम कर दी जाएगी। सालाें से स्टेशन पर काम करने वाले कर्मचारी रेलवे के इस प्लान का विरोध कर रहे हैं।

रेलवे बोर्ड ने हाल ही में सफाई समेत अन्य निविदा की शर्ताें में बदलाव कर दिया है। पहले सफाई कार्य करने वाली कंपनियों को कर्मचारियों की संख्या आधार पर भुगतान किया जाता था, लेकिन अब रेलवे ने कंपनी के काम के प्रदर्शन के आधार पर भुगतान करने की प्रक्रिया की है। सभी जोनल और मंडल अधिकारियों को इसी अनुसार कामों की निविदा प्रक्रिया कराने के लिए कहा गया है। हाल ही में झांसी में ट्रेनों की सफाई और पानी भरने के लिए निविदा प्रक्रिया की गई। इसमें ग्वालियर की एक कंपनी को दो साल के 7.5 करोड़ रुपये में सफाई और पानी भरने का काम सौंपा गया है। नई कंपनी 16 नवंबर से काम शुरू करेगी। जबकि 2019 में यह काम 21 करोड़ रुपये में चार साल के लिए एक कंपनी को दिया गया था। इससे रेलवे को तो हर साल 1.75 करोड़ रुपये की बचत होगी।

मगर टेंडर के शर्ताें में बदलाव ने झांसी स्टेशन पर काम करने वाले 150 कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल, रेलवे स्टेशन पर 180 कर्मचारी रोज 28 से 30 ट्रेनों में सफाई और पानी भरने का काम करते हैं। कर्मचारी राकेश का कहना है कि जब कंपनी को भुगतान कम होगा, तो वह कर्मचारियों को कम भुगतान करेगी। जबकि अभी पूरा भुगतान मिल रहा है। साथ ही कर्मचारियों की संख्या भी कम कर दी जाएगी। आसिफ अली का कहना है कि सालों से यही काम कर रहे हैं। अब नई कंपनी द्वारा कर्मचारियों की कटौती करने की बात सुनी है, तो चिंता बढ़ रही है।

हर साल 650 कोच की होती है सफाई

झांसी रेलवे स्टेशन पर साल भर में 650 कोचों की सफाई होती है। साथ ही 2200 कोचों में पानी भरा जाता है। एक ट्रेन सभी कोचों की सफाई में 33 कर्मचारी लगते हैं। जबकि ट्रेन को 5-6 मिनट में साफ करना होता है। अब तक एक साल में रेलवे इस काम पर 5.5 करोड़ रुपये खर्च कर रहा था। मगर अब इस पर 3.75 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

100 रुपये प्रति कोच कम किएरेलवे का जोर सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने पर है। अफसरों का कहना है कि काम प्रदर्शन के आधार पर भुगतान की व्यवस्था होने से सफाई व्यवस्था बेहतर होगी। पहले रेलवे एक कोच की सफाई पर 130 रुपये खर्च करता था, लेकिन अब यह काम 26 रुपये में होगा। वहीं शिकायत पाए जाने पर कंपनी पर जुर्माना लगेगा।

वर्जन

रेलवे ट्रेनों और स्टेशनों पर सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहा है। सफाई के टेंडरों की शर्ताें में बदलाव रेलवे बोर्ड के आदेश पर हुआ है। कार्यदायी संस्था को न्यूनतम मजदूरी दर कानून के आधार पर ही कर्मचारियों को भुगतान करना होगा। नई व्यवस्था के बाद सफाई बेहतर हो जाएगी। – मनोज कुमार सिंह, पीआरओ



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