उरई। जिले में 6.4 करोड़ रुपये की लागत से चार गो संरक्षण केंद्र बनेंगे। इससे किसानों को अन्ना मवेशियों से राहत मिलेगी। दो के लिए बजट आवंटन भी हो गया है।
दो लाख 41 हजार गोवंश जिले में पंजीकृत हैं। जिनमें से 403 गोशालाओं में 34,845 गोवंश संरक्षित हैं। जिनकी देखरेख प्रशासन की ओर से की जा रही है। इसके बाद भी अन्ना गोवंश किसानों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सड़कों पर मवेशियों के आने से हादसे हो रहे हैं।
अब ज्यादा अन्ना गोवंश गोशाला में रखे जा सकेंगे। ब्लॉक डकोर के गांव बधा और ब्लॉक नदीगांव के रूपपुरा गांव में गो-संरक्षण केंद्र बनाने के लिए प्रस्ताव गया है। वहीं ब्लॉक डकोर का गांव नुनवई और कुठौंद ब्लॉक का गांव जुगराजपुरा में गोशाला बनाने के लिए बजट विभाग को मिल गया है। एक गो संरक्षण केंद्र पर 1.60 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। दो के लिए 60- 60 लाख रुपये मिल गए हैं। एक केंद्र का इनका निर्माण करीब 2250 वर्गमीटर में होगा। जिसमें करीब 300 गोवंश संरक्षित किए जाएंगे। बाकी गोशाला से यह केंद्र गोवंश के लिए महफूज होंगे। 24 घंटे इनके पानी से लेकर भूसा और दवाई का इंतजाम किए जाएंगे। देखरेख के लिए कर्मचारी लगाए जाएंगे। सर्दी,गर्मी से बचने के लिए इंतजाम होंगे।
बजट मिला जल्द काम होगा शुरु
गोवंशों को संरक्षण के लिए लगातार सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। अभी दो केंद्रों को लिए बजट मिल गया है। इन पर काम शुरु करवाने के लिए कागजी कार्रवाई चालू है। रबी की फसल कटने तक अच्छे नतीजे देखने को मिलेंगे।
डॉ. अखिलेश सचान, सीवीओ
प्रत्येक गो संरक्षण केंद्र में चार गोवंश शेड, भूसा गोदाम, एक कार्यालय, औषधि कक्ष व स्टोर होगा। इसके साथ ही करीब पांच से छह कर्मचारियों के लिए आवास, स्नानाघर, शौचालय
चार चरही (चारा, पानी के लिए), 10-15 हजार लीटर क्षमता की पानी की टंकी व बाउड्रीवाल का निर्माण होगा।
