झांसी। ललितपुर के रहने वाले डॉ. समीर सर्राफ समेत अन्य लोगों ने इटावा के उत्तर प्रदेश आर्युविज्ञान विश्वविद्यालय सैफई में तैनाती के दौरान 2019 में एक करोड़ रुपये की अनावश्यक और मनमानी खरीद की। जबकि, कैथ लैब में पहले से ही एक से डेढ़ साल का सामान उपलब्ध था। खरीद में लाखों रुपये की धांधली भी हुई। पुलिस ने उन्हें जेल भेज दिया है।
पेसमेकर घोटाले में सर्जन डॉ. समीर को मंगलवार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। उनकी गिरफ्तारी होने के बाद बुधवार को विश्वविद्यालय प्रशासन ने निलंबित कर दिया। इस प्रकरण में डॉक्टर को पहले भी निलंबित किया गया था। दरअसल, 24 दिसंबर 2021 में सैफई थाने में डॉ. समीर व अन्य लोगों के खिलाफ वित्तीय अनियमितता करने पर मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की जांच के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर दी थी। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें डॉक्टर द्वारा किए गए भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ। कार्डियोलॉजी विभाग की कैथ लैब में एक से डेढ़ साल का सामान होने के बावजूद डॉ. समीर समेत भ्रष्टाचार में संलिप्त लोगों ने 2019 में करीब एक करोड़ की मनमानी और गैर जरूरी खरीद कर डाली। विश्वविद्यालय प्रशासन की जांच में इसकी पुष्टि होने पर तत्कालीन कुलपति ने भुगतान पर रोक लगा दी। जनवरी 2020 से ही डॉ. समीर द्वारा खरीदा गया सामान विश्वविद्यालय के स्टोर में रखा हुआ है। मगर पिछले दो साल से कभी भी इनका इस्तेमाल नहीं किया गया। अब ये सामान एक्सपायर होने वाले हैं। चिकित्सक ने कई मरीजों से धोखाधड़ी कर गलत पेसमेकर लगा दिए।
प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना में भी मरीजों से कर डाली वसूली
डॉ. समीर ने भ्रष्टाचार की सीमा पार कर दी। एक तरफ, उन्होंने मरीजों से धोखाधड़ी कर गलत पेसमेकर लगा दिए। इसके एवज में मरीजों से अधिक पैसा भी वसूला। दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना के तहत भर्ती मरीजों से भी ज्यादा पैसा वसूल लिया। जबकि, योजना के तहत मरीज को पांच लाख रुपये तक का सालाना नि:शुल्क इलाज मिलता है।
निजी कंपनियों को पहुंचाया मुनाफा, विदेश की सैर की
डॉक्टर ने सपरिवार कई नियम विरुद्ध अनाधिकृत विदेश यात्राएं भी कीं। ये यात्राएं उन कंपनियों द्वारा प्रायोजित थीं, जिनके पेसमेकर समेत अन्य उपकरण का इस्तेमाल डॉक्टर द्वारा किया जा रहा था। ये भ्रष्टाचार आर्थिक अपराध के अंतर्गत आता है।
ललितपुर में खोला है क्लीनिक, झांसी में भी की प्रैक्टिस
डॉ. समीर की 10वीं तक की शिक्षा झांसी में हुई। एमबीबीएस समेत मेडिकल की पढ़ाई लखनऊ से की। डॉक्टर का ललितपुर में क्लीनिक है। शुरुआत में वह महीने में एक दिन मोटी फीस लेकर मरीजों को देखते थे। जब मरीजों की संख्या बढ़ी तो महीने में दूसरे और आखिरी रविवार को वह क्लीनिक संचालित करने लगे। आरोप है कि वह ऐसी कंपनियों की दवाएं लिखते थे, जो उनके द्वारा तय मेडिकल स्टोर पर ही मिलती थी। चूंकि शहर में कोई कार्डियोलॉजिस्ट नहीं है। ऐसे में मजबूरी में ह्रदय रोगियों को अपना इलाज इनसे कराना पड़ता था। डॉ. समीर ने ललितपुर में परामर्श का शुल्क 400 रुपये निर्धारित किए थे। ईसीजी के 500, ईको जांच के 1500 रुपये वसूलते थे। जनपद के कई मरीज उनसे इलाज कराने के लिए सैफई तक जाते हैं। सूत्रों ने बताया कि निलंबन काल में पिछले साल उन्होंने झांसी के एक निजी अस्पताल में भी कुछ महीने प्रैक्टिस की।
ट्रैक्टर चालक को पीटते हुए वायरल हुआ था वीडियो
मेडिकल कॉलेज के पास विश्वविद्यालय चौकी के सामने पिछले साल ट्रैक्टर चालक से किसी बात को लेकर डॉ. समीर की कहासुनी हो गई थी। इसके बाद डॉक्टर ने चालक को पीटना शुरू कर दिया था। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था।
पिता हुए लखनऊ रवाना, बोले-बेटा निर्दोष
ललितपुर के सिविल लाइन कॉलोनी निवासी डॉ. समीर सराफ के पिता जिनेंद्र जैन बार एसोसिएशन के पूर्व पदाधिकारी और पूर्व सभासद सहित कई साथ अन्य कई पदों पर रहे हैं। इनकी मां आभा जैन भी पूर्व सभासद रह चुकी हैं। उन्हें बेटे की गिरफ्तारी की जानकारी हुई तो वह बृहस्पतिवार को लखनऊ के लिए रवाना हो गए। मोबाइल पर बातचीत में उन्होंने बताया कि बेटा निर्दोष है। उसे साजिश के तहत फंसाया गया है। वह अधिकारियों से मिलकर बेटे का पक्ष रखेंगे। उन्होंने बताया कि ललितपुर के करीब पांच सौ लोगों का बेटे ने सैफई में इलाज किया है।
