उरई। दीपावली के त्योहार के बाद काम-धंधे पर वापस लौटने वालों को टिकट नहीं मिल पा रही है।
बुधवार को तत्काल टिकट के लिए लाइन में लगे लोगों को न तो एसी में जगह मिली और न ही स्लीपर कोच में। ऐसे में कई यात्री मायूस होकर लौट गए।
दीपावली के त्योहार पर घर आए लोग वापस मुंबई, गुजरात, हैदराबाद आदि स्थानों पर लौटने की तैयारी करने लगे हैं। बुधवार को उरई रेलवे स्टेशन पर एसी कोच में तत्काल टिकट के लिए 20 लोगों ने नंबर लगाया था, जिसमें अधिकांश मुंबई, गुजरात आदि क्षेत्रों के लिए जाने वाले थे। लेकिन सिर्फ आठ लोगों के ही टिकट बन सके और बाकी यात्री मायूस रहे।
इसी तरह का हाल स्लीपर कोच की भी रहा। स्लीपर में तत्काल टिकट के लिए 35 लोगों ने नंबर लगाया था। इसमें 11 लोगों के ही टिकट बन पाए। स्लीपर कोच में ज्यादा मारामारी रही। अधिकांश यात्रियों को तत्काल का भी टिकट नहीं मिल पाया। सबसे ज्यादा खराब स्थिति पुष्पक के टिकटों के लिए रही। इसमें एक भी यात्री को न तो स्लीपर का टिकट मिला और न ही एसी में तत्काल का टिकट मिल पाया।
पनवेल एक्सप्रेस, उद्योगनगरी एक्सप्रेस में भी टिकट नहीं मिल पाई। कुछ मुंबई जाने वाले यात्रियों ने झांसी से बोर्डिंग कराकर टिकट कराया। कुकरगांव निवासी प्रमोद को उरई से अहमदाबाद जाना था। उन्होंने साबरमती एक्सप्रेस में तत्काल के लिए नंबर लगाया था लेकिन उन्हें मायूसी हाथ लगी। बड़ागांव निवासी रेखा को उरई से पुणे जाना था।
उन्होंने स्लीपर कोच के लिए तत्काल का नंबर लगाया था लेकिन उन्हें मायूसी हाथ लगी। सुशीलनगर निवासी अमन मिश्रा मुंबई में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। उन्हें भी मुंबई जाना था लेकिन उन्होंने एसी सेकेंड के लिए तत्काल में नंबर लगाया था। उनका भी टिकट नहीं मिल पाया।
उरई। कुछ लोग त्योहार मनाकर लौट रहे तो कुछ भाईदूज के लिए बहन के पास जाने के लिए बस के टाइट टाइम टेबल को लेकर परेशान हुए। जो कई महीनों बाद बस स्टैंड पहुंचे उन्होंने समय और स्टॉप समझने में समय लगाया।
क्योंकि मौसम और बस स्टैंड में हुए विस्तार के बाद सभी को परेशान होना पड़ता है। त्योहार में कंपनी से मिली छुट्टी पर भी कुछ लोग घर आए थे। जिन्हें बस के लिए अलग से समय निकालना पड़ा। रोडवेज बस की जगह लोगों ने जल्दी के चलते डग्गामार वाहनों का भी सहारा लिया। जिससे बस स्टैंड पर काफी संख्या यात्रियों की देखने को मिली। लोगों ने बताया कि रोज तो आना होता नहीं है। जब कभी आना होता है तो शहर में कुछ न कुछ बदलाव देखने को मिलता है। इस बार बस स्टैंड ही बदल गया।
बस स्टैंड पर इंतजार कर रहे हसीम ने बताया कि मऊरानीपुर में एक कंपनी में नौकरी करते हैं। दिवाली की छुट्टी में घर आया था। कई महीनों बाद आना हुआ तो बस का कोई समय नहीं पता था। सुबह वाली बस भी निकल गई। स्टॉफ ने कोई जानकारी नहीं दी।
राजकुमार ने बताया कि गुजरात से आए हैं। भाईदूज के लिए बहन के घर जालौन पास के गांव में जाना है। बस का कोई समय पता नहीं है। इस लिए तीन घंटे से इंतजार कर रहे हैं। एक बस आई थी, वह ज्यादा भरी हुई थी। प्राइवेट बस की जानकारी नहीं है।
