उरई। कानपुर के हैलट अस्पताल से पुलिस अभिरक्षा से भागा खुद को एसटीएफ का दरोगा बताने वाला जितेंद्र परिहार दोबारा मुठभेड़ में गिरफ्तार कर लिया गया।
गुरुवार को एसओजी सर्विलांस व कुठौंद पुलिस ने दूसरे पैर में गोली मारकर उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को उसके पास से तमंचा-कारतूस व एक बाइक मिली है। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
रामपुरा थाना के जगम्मनपुर निवासी जितेंद्र परिहार उर्फ शैलेंद्र फर्जी एसओजी व एसटीएफ का दारोगा बनकर लोगों के साथ लूटपाट करता था। वह औरैया का वांछित अपराधी था। 10 नवंबर को एसओजी सर्विलांस और उरई कोतवाली पुलिस ने जितेंद्र व उसके साथी गजेंद्र को पुलिस मुठभेड़ में राहिया के पास से गिरफ्तार किया था। फायरिंग में जितेंद्र के दाएं पैर में गोली लग जाने पर पुलिस ने उसे जिला अस्पताल पहुंचाया था, जहां से उसे कानपुर के हैलट के लिए रेफर कर दिया गया था।
हैलट में उसका इलाज चल रहा था। उसकी निगरानी के लिए सिपाही दीपेंद्र और तेज सिंह को लगाया गया था। सोमवार को वह दोनों को चकमा देकर भाग गया था। इसके बाद एसपी ने दोनों सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया था। साथ ही जितेंद्र की गिरफ्तार के लिए टीमों को लगाया था। गुरुवार शाम एसओजी, सर्विलांस और कुठौंद थाना पुलिस को जानकारी मिली कि जितेंद्र बाइक से बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के पास सर्विस रोड पर गोरा मोड़ के पास खड़ा है।
इस पर पुलिस ने घेराबंदी की। खुद को घिरता देख तमंचे से पुलिस पर फायरिंग की। जवाबी फायरिंग में पुलिस ने उसके बाएं पैर पर गोली मार दी और गिरफ्तार कर लिया।
