चित्रकूट। संत कबीर अकादमी, संस्कृति विभाग और अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान ने बुंदेलखंड कबीरी महोत्सव का आयोजन भारत जननी परिसर रानीपुर भट्ट में किया। कबीरी महोत्सव में बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट और महोबा की विभिन्न टीमों ने शिरकत की।
मुख्य अतिथि डॉ. कौशलेंद्र दास ने कबीरी कुतुवा राम का मोतिया मोरो नाव, गले राम की सांकरी जित खिंचे तित जांव… दोहे के माध्यम से कबीर के दर्शन के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि कबीर की डांट फटकार मन को उद्वेलित एवं आंदोलित करती है। कबीर ने विभिन्न धर्मों में मचे झगड़ों को भी विचारों से सुलझाया।
संस्कृति विभाग के विशेष सचिव आनंद कुमार ने कहा कि कबीर जन्म एवं लालन-पालन से ही दो धर्मों के माने जाने लगे थे। अत: धर्म संप्रदाय को किनारे करके आत्मावलोकन किया है। अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान के संस्थापक गोपाल भाई ने विलुप्त हो रही ऐसी सांस्कृतिक विधाओं को भारत जननी परिसर में एक मंच देने के लिए आह्वान किया। उन्होंने कबीरी महोत्सव को लगातार जारी करने की भी बात कही। इसके बाद नरैनी बांदा से दयाराम, बड़ोखर बुजुर्ग बांदा से चंद्रपाल सिंह, बिवांर हमीरपुर से प्रहलाद व चित्रकूट से सुमित्रा देवी की टीमों ने कबीरी गायन में प्रतिस्पर्धात्मक प्रदर्शन किया।
ग्रामोदय विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष लल्लूराम शुक्ल ने वर्ण व्यवस्था के बारे में कबीर की वाणी को बताया। इस मौके पर सांसद आरके सिंह पटेल, सदर विधायक अनिल प्रधान, पूर्व सांसद भैरों प्रसाद मिश्र, कोऑपरेटिव चेयरमैन पंकज अग्रवाल, रंजना उपाध्याय, जगदीश गौतम, मानसिंह पटेल, जगमोहन सिंह, आशुतोष द्विवेदी व राष्ट्रदीप आदि मौजूद रहे।
