उरई। जिले के कई पेयजल कनेक्शन धारकों की मनमानी ने जलसंस्थान को एक साल पीछे कर दिया है, भारी-भरकम बकाया जमा न होने से विभाग आर्थिक रूप से लगातार पिछड़ता जा रहा है।
विभाग को एक साल में शासन से करीब 16 करोड़ रुपये की वसूली का लक्ष्य मिलता है।
सरकारी विभागों समेत आम व कमर्शियल उपभोक्ताओं पर इतना ही बकाया विभाग का फंसा हुआ है। अब विभाग ने आरसी जारी करने के बाद बड़े बकायेदारों की सूची तैयार कर बोर्ड को कार्यालय गेट के पास लगाकर सार्वजनिक कर दिया है, कुर्की की भी तैयारी शुरू कर दी गई है।
जिले में सरकारी विभाग समेत करीब 85 हजार पेयजल कनेक्शन हैं। इसमें 28 हजार 500 कनेक्शन उरई शहर के हैं। पूरे जिले में कनेक्शनधारकों पर विभाग का नौ करोड़ सहित करीब 16 करोड़ बकाया है। विभागीय जानकारी के अनुसार इन बकायेदारों में 50 फीसदी से ज्यादा वे बकायेदार हैं, जिन पर लंबा बकाया है।
10 हजार रुपये से अधिक बकायेदार वाले कनेक्शन धारकों की संख्या सबसे ज्यादा है। इन बकायेदारों से वसूली कार्रवाई को लेकर विभाग ने पूर्व में तीन बार नोटिस जारी किया था। बकाया जमा न होने पर करीब 300 बकायेदारों को आरसी जारी कर दी गई है। अब हर मोहल्ले से करीब तीन-तीन बड़े बकायेदारों के नाम के साथ 80 बकायेदारों की सूची बनाकर नाम सार्वजनिक करते हुए बोर्ड लगा दिया गया है।
सरकारी विभागों ने भी पानी पीया, लेकिन बिल नहीं दिया
-जलसंस्थान का बंटाधार करने में सिर्फ आम उपभोक्ता ही नहीं हैं, बल्कि सरकारी विभाग भी खूब पलीता लगा रहे हैं। इनमें भी टॉप 10 में वे बकायेदार हैं, जो स्वयं राजस्व संबंधित जिम्मेदारी निभाते हुए सरकार के खजाने को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इनमें तहसील, बैंक, विद्यालय व जिला परिषद आदि हैं।
विभागीय जानकारी के अनुसार 35 ऐसे सरकारी विभाग हैं, जिन पर जलसंस्थान का करीब 60 लाख रुपये बकाया है। इनको एक बार नोटिस जारी भी किया जा चुका है। बकाया जमा न करने पर दूसरी बार फिर नोटिस जारी कर दिया गया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अब भी बकाया जमा नहीं करते हैं तो तीसरा नोटिस और फिर आरसी जारी करने की कार्रवाई की जाएगी।
जिन बकायेदारों को तीन बार नोटिस जारी किया जा चुका है, उनकी आरसी भी जारी कर दी गई है। बड़े बकायेदारों के नाम सूची के साथ बोर्ड के माध्यम से सार्वजनिक किए गए हैं। सरकारी विभागों को भी बकाया जमा नहीं करने पर नोटिस जारी किया गया है। उन पर भी आरसी काटी जाएगी। -विकास चौहान, अधिशासी अभियंता, जलसंस्थान
