अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जनता के प्यार और विश्वास ने उनको प्रधान बना दिया, लेकिन अशिक्षा उनके लिए मुसीबत बनने लगी। अधिकारी आते और निरक्षर होने का फायदा उठाकर किसी न किसी दस्तावेज पर अंगूठा लगवा ले जाते। बैठकों में जाने पर शिक्षित लोगों के साथ बैठने में शर्म लगती। इसलिए हिम्मत बांधी और घर के बच्चों के साथ क, ख, ग सीखना शुरू कर दिया।नतीजा हुआ कि आज वे हर सरकारी पत्र खुद पढ़ते हैं और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते हैं। ललितपुर के 17 निरक्षर प्रधानों ने शिक्षा की ओर कदम बढ़ाकर नई मिसाल कायम की है। अब वे अपने ग्राम पंचायत की कमान खुद संभाले हुए हैं। खास बात यह है कि साक्षर बनने वालों में सबसे ज्यादा 11 महिला प्रधान हैं।
जिले की 415 ग्राम पंचायतों में से 17 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान निरक्षर थे। वे पढ़ना-लिखना तो दूर हस्ताक्षर तक नहीं कर पाते थे। इनमें 11 महिला प्रधान व छह पुरुष प्रधान शामिल थे। ग्राम प्रधान बनने के बाद सरकारी बैठकों में गए तो यहां शिक्षित प्रधानों के साथ उठना बैठना पड़ा। इस पर निरक्षर होने पर शर्मिंदगी महसूस होने लगी। अफसर भी योजनाओं के बारे में पूछने पर गोल-गोल घुमाते थे। किसी न किसी कागज पर अंगूठा लगवा ले जाते।
इस पर ग्राम प्रधानों ने पढ़ने का फैसला किया। निरक्षर प्रधानों ने घर के बच्चोें के साथ बैठकर 2-3 घंटे तक पढ़ाई करना शुरू की। आज ये प्रधान अंगूठा लगाने के बजाय हस्ताक्षर करने लगे है। कुछ प्रधान तो इतने शिक्षित हो चुके हैं कि ग्राम पंचायत के विकास संबंधी आदेशों को पढ़ते हैं।
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प्रधान का चुनाव जीतने का बाद घर पर पढ़ाई करते हुए हस्ताक्षर करना सीखा। शुरू में कुछ कठिनाई आई, लेकिन हिम्मत नहीं हारी और बैठकों में भाग लेने के साथ विकास कार्य कराते हैं। अब किसी भी पत्र को किसी से पढ़ाने की जरूरत नहीं पढ़ती, बल्कि खुद पढ़ने के बाद ही उस पर हस्ताक्षर करते हैं। – हरनाम, प्रधान, ककोरिया ग्राम पंचायत
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प्रधान बनने के बाद कागज पर अंगूठा लगाना शर्मनाक लगता था। पहले घर में बच्चों के साथ किताब पढ़ना और लिखना सीखा। अब अंगूठा लगाने की जगह हस्ताक्षर करने लगीं हूं। ग्राम सभा में विकास कार्य हो या फिर अन्य कोई काम खुद देखती हूं। इस काम में परिवार के लोग हमारे सहयोगी हैं। – पार्वती, ग्राम प्रधान, पाली रूरल
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फैक्ट फाइल
जिले के प्रधानों की यह है शैक्षिक योग्यता
-17 निरक्षर
– 162 कक्षा 5वीं पास
– 94 कक्षा 8वीं पास
– 43 कक्षा 10वीं पास
– 37 कक्षा 12वीं पास
– 44 स्नातक
– 18 परास्नातक
वर्जन
कई निरक्षर प्रधानों ने पढ़ाई लिखाई कर अपना काम खुद करना शुरू किया है। अब वह अंगूठे की जगह हस्ताक्षर कर रहे हैं। यह अच्छा प्रयास है। ग्राम पंचायतों में शैक्षिक स्तर सुधारने के लिए पुस्तकालय का निर्माण भी कराया जा रहा है।- नवीन मिश्रा, जिला पंचायत राज अधिकारी
