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चित्रकूट। जल और नदियों के संरक्षण के लिए अयोध्या से रामेश्वर तक पदयात्रा पर निकलीं वाटर वुमन शिप्रा ने कहा कि भारतीय नारी अपनी संस्कृति से विमुख होकर पाश्चात्य सभ्यता अपना रही है। यह बेहद घातक है। कहा कि महिलाओं को माता सीता, अहिल्याबाई और लक्ष्मीबाई को अपना आदर्श बनाना चाहिए। राम-जानकी वन गमन मार्ग पर जानकी वाटिका बनाई जाए। नदियों की स्वच्छता के लिए हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे।

रविवार को कामदगिरी मंदिर के कार्यालय में संत मदन गोपाल दास के साथ पत्रकारों से बातचीत में शिप्रा ने कहा कि उनका किसी राजनैतिक दल से संबंध नहीं है। वह सिर्फ नदियों और पर्यावरण संरक्षण के लिए पदयात्रा कर रहीं हैं। बताया कि अयोध्या में सरयू नदी तट से 27 नवंबर से शुरू हुई 4000 किमी लंबी पदयात्रा यूपी, एमपी, महाराष्ट्र होते हुए रामेश्वर में समाप्त होगी। यात्रा के बारे में बताया पूरा मार्ग भगवान राम के रामायण काल से जुड़ा है। वह पर्यावरण सरंक्षण का संदेश दे रहीं हैं। सात साल के इस सफर में अब तक 12 लाख पौधे लगा चुकी हैं।

मंदाकिनी नदी के प्रदूषण पर कहा कि लोग जागरूक नहीं हो रहे हैं। अंधविश्वास और रूढ़वादिता से दूर हटकर काम करें। महिलाएं इसमें प्रमुख भूमिका निभा सकती हैं। महिलाओं को वीरांगनाओं को अपना आदर्श बनाना चाहिए। माता जानकी सिर्फ श्रीराम के साथ चलने वाली महिला नहीं, बल्कि वीरांगना थीं। उनके चरित्र से प्रेरणा लेनी चाहिए। उनके साथ मां मृदुला पाठक, पिता शैलेश पाठक, भाई अंकित पाठक और बहन साक्षी शर्मा भी मौजूद रहीं।



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