तिंदवारी। जसपुरा क्षेत्र की 32 ग्राम पंचायतों में 21 अस्थायी गोशालाएं हैं। इनमें 2978 मवेशियों संरक्षित हैं। संचालकों ने बिना किसी अफसर के आदेश के गोशालाओं में संरक्षित मवेशियों को छोड़ दिया है। इससे क्षेत्र की 21 गोशालाएं खाली पड़ी हैं। अब तीन हजार मवेशी फिर से पानी और चारे के लिए दर-दर भटक रहे हैं। ज्यादातर मवेशी सड़कों पर हैं। इससे राहगीरों के साथ ही मवेशी भी हादसे का शिकार हो रहे हैं।
जसपुरा समेत सिकहुला, नरजिता, गौरीकला, अमारा, गड़रिया, नरायन, रामपुर, गाजीपुर, झंझरी, कानाखेड़ा, गलौली, चंदवारा, बड़ागांव, गढ़ोला आदि के अस्थायी गोशालाओं में संरक्षित मवेशियों को छोड़ दिया गया है। शिवभूषण सिंह का कहना है कि सरकार गोशालाओं के रख रखाव के लिए धनराशि देती है, लेकिन बंदरबांट में गोशालाओं की हालत बदतर है।
रामखेलावन का कहना है कि बुंदेलखंड का किसान गरीब इसीलिए है कि वह एक फसली ही कृषि कर पाता है, यदि गोवंश गोशालाओं में संरक्षित रहें तो वह गर्मियों वाली फसलें भी पैदा करें। जगदीश प्रसाद का कहना है कि हमेशा अप्रैल माह के अंत तक मवेशियों को अन्ना कर दिए जाता है, पिछले वर्ष तीन बीघे में सब्जी उगाई, अप्रैल में गोशालाओं के मवेशियों को खोल दिया गया।
मवेशियों के झुंड ने एक ही रात में पूरी सब्जी की फसल सफाचट कर दिया था। सारी मेहनत बर्बाद गई थी। उन्हें पता था कि इस वर्ष भी गौशालाओं के जानवर छोड़ दिये जायेगें इसलिए उन्होंने खेत को खाली छोड़ रखा है। आनंद कुमार का कहना है कि यदि दो तीन वर्ष लगातार गोशालाओं में जानवरों को संरक्षित रखा जाय तब किसान गर्मियों की फसल बोने के बारे में कुछ सोचेंगें। अन्ना प्रथा रोकने के वादे मात्र से किसानों की हालत नहीं बदलने वाली।
एडीओ पंचायत ओपी पाल का कहना है कि बुंदेलखंड में अधिक गर्मी होती है प्रति वर्ष फसल कटने के बाद मवेशियों को गोशालाओं से खोल दिया जाता था, इसलिए इस वर्ष भी फसल कटने के बाद अब गोशालाओं से मवेशियों को छोड़ दिया गया है। गोशालाओं में छाया की व्यवस्था नहीं है अधिक गर्मी पड़ने से मवेशियों की मौतें गोशालाओं में ही होने लगीं थीं। इस कारण से सभी गोशालाओं को खाली करवा दिया गया है। आधिकारिक रूप से किसी का आदेश नहीं है।
