Spread the love


चित्रकूूट। करोड़ों रुपये के चोरी के पाइप का धंधा करने वालों का काम लगभग एक साल से चल रहा था। केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन योजना में गांव में बिछाने वाले भारी व लंबे पाइपों को सड़कों के किनारे रखा गया है। ऐसे में इनकी चोरी आसानी से हो रही है। पूरे काम में विभागीय किसी अधिकारी कर्मचारी भी भूमिका को लेकर हर बार सवाल उठते हैं। 30 रुपये किलो में खरीदे जाने वाले चोरी के पाइप बाजार में 110 रुपये किलो के दाम पर बेे जा रहे थे।

जांच अधिकारी इनकी संलिप्तता से इंकार भी नहीं करते। इस चोरी का राज मोबाइल से फैक्ट्री के एक कर्मचारी से 450 बार बातचीत से जांच अधिकारियों को शक हुआ। जांच के बाद इसी से पूरा राज खुल गया। कानपुर देहात के रनिया स्थित डिलाइट इंटरप्राइसेस प्राइवेट लिमिटेड के मालिक कानपुर निवासी बृजकिशोर व कर्मचारी औरेया निवासी श्रीगोपाल राजपूत के पकड़े जाने के बाद पुलिस ने बताया कि ऐसी कई शैल कंपनियां हैं जो फर्जी जीएसटी नंबर से फर्जी बिल बाउचर बनाकर करोड़ों का काम कर रही हैं। यह सब चोरी के पाइपों को कबाड़ के भाव 30 रुपये किलो में खरीदते हैं। इनके जल जीवन मिशन के स्टीकर को काटकर उसके स्थान पर नये पाइप जोड़कर अपनी फैक्ट्री का नया स्टीकर लगाते हैं। इसके बाद बाजार में इसे 110 रुपये किलो के हिसाब से बेचते हैं।

चित्रकूट। जल जीवन मिशन योजना में उच्च क्वालिटी के पाइप का प्रयोग हो रहा है। बताया गया कि ऐसे पाइप का निर्माण देश में सिर्फ टाटा, जिंदल व इलैक्ट्रो स्टील ही कराती है। इनकी मांग अधिक होने से चोरी कर कालाबजारी हो रही है।

चित्रकूट। एसपी वृंदा शुक्ला, अपर एसपी चक्रपाणि त्रिपाठी व सीओ लाइंस निष्ठा उपाध्याय ने बताया कि दोनों आरेापियों को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया है। जल्द ही दोनों को रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की जाएगी इससे कई और राज उजागर हो सकते हैं। खुलासे में शामिल एसओजी, सर्विलांस व रैपुरा पुलिस टीम के प्रयास की सराहना कर दस हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की गई।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *