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अमर उजाला ब्यूरो

ललितपुर। गुरुद्वारा साहिब में गुरु अर्जुन देव महाराज के शहीदी दिवस के उपलक्ष में चल रहे 40 दिवसीय कार्यक्रम में मंगलवार को श्री सुखमणि साहिब के पाठों की लड़ी संपन्न हुई। मुख्य ग्रंथी ज्ञानी हरविंदर सिंह ने गुरबाणी कीर्तन व कथा से संगत को निहाल किया।

गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष ओंकार सिंह सलूजा ने कहा कि अर्जुन देव जी गुरु राम दास के सुपुत्र थे। उनकी माता का नाम बीवी भानी था। गोइंदवाल साहिब में उनका जन्म सोढ़ी खत्री परिवार में 15 अप्रैल 1563 को और विवाह 1579 में हुआ। सिख संस्कृति को गुरु जी ने घर-घर तक पहुंचाने के लिए अथाह प्रयत्न किए। गुरु दरबार की सही निर्माण व्यवस्था में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ग्रंथ साहिब के संपादन को लेकर कुछ असामाजिक तत्वों ने अकबर बादशाह से कहा कि ग्रंथ में इस्लाम के खिलाफ लिखा गया है, लेकिन बाद में जब अकबर को वाणी की महानता का पता चला, तो उन्होंने भाई गुरदास एवं बाबा बुढ्ढा के माध्यम से 51 मोहरें भेंट कर खेद ज्ञापित किया।

वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरविंदर सिंह सलूजा ने कहा कि जहांगीर ने लाहौर जो की अब पाकिस्तान में है, 30 मई 1606 को अत्यंत यातनाएं देकर उनकी हत्या करवा दी। वे अपने युग के सर्वमान्य लोकनायक थे, जो दिन-रात संगत सेवा में लगे रहते थे। महामंत्री सुरजीत सिंह सलूजा ने बताया कि अनेक कष्ट झेलते हुए गुरु जी शांत रहे, उनका मन एक बार भी कष्टों से नहीं घबराया। सुबह श्री अखंड पाठ साहिब जी की समाप्ति और लंगर की सेवा सरदार हरजीत सिंह अरोड़ा परिवार की ओर से हुई। छबील की सेवा सरदार वीरेंद्र सिंह परिवार की ओर से हुई। सिख समाज की ओर से पानी की प्याऊ पर सतीश अरोरा, अरविंद अरोरा ने राहगीरों को पिलाया।

ये रहे मौजूद

परमजीत सिंह, गुनबीर सिंह, परसन सिंह, गुरमुख सिंह, मेजर सिंह, सुरजीत सिंह, जगजीत सिंह, मनजीत सिंह परमार, गुरबचन सिंह सलूजा, नरेंद्र सिंह, सतनाम सिंह भाटिया, सतनाम सिंह डिंपी, स्त्री साध संगत की अध्यक्षा बिंदु कालरा, डॉ हरजीत कौर, गुरदीप कौर अमरजीत कौर ,गोल्डी कौर, मनजीत कौर, जसविंदर कौर सलूजा, कामनी अरोरा,अमरजीत कौर सलूजा,ऋतु कौर,नीतू कौर,मनजीत कौर कसरूजा, जसप्रीत कोर, दलजीत सिंह, चरणजीत सिंह, तानदीप सिंह, आनंद सिंह, सुमेर सिंह, मजबूत सिंह,भगत सिंह, प्रदीप सिंह, सुनील सिंह,बबली सिंह,गुरबचन सिंह, मंत्री मनजीत सिंह सलूजा, राजेश सिंह आदि।



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