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राम विवाह की कथा सुन श्रोता हुए भावविभोर

अमर उजाला ब्यूरो

जखौरा। कथाव्यास जुगल किशोर महाराज ने राम विवाह की कथा में कहा कि राजा जनक को बेटियों को सुयोग्य वर प्राप्त होने के बाद भी विदाई करने पर भी वेदना हुई। रानी सुनैना ने अपनी बेटियों को विदाई के समय उपदेश दिया कि हमेशा मर्यादाओं को बनाए रखना उनका धर्म है ताकि कोई माता-पिता के दिए गए संस्कारों पर कोई उंगली न उठा सके।

कस्बा जखौरा स्थित श्री खेड़ापति हनुमान डार बब्बा मंदिर प्रांगण में जारी श्रीराम कथा में सातवें दिन कथा व्यास जुगल किशोर महाराज ने कहा कि राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न चारों राजकुमार के साथ बहुएं अवधपुरी पहुंचीं जहां अवध की नारियों ने घर-घर दीप जलाकर आरती की। राजकुमारों के स्वागत में तीनों माताओं ने अवध की परंपराओं के साथ आगे की रस्म पूरी की। रामजी के राज तिलक की तैयारियों की चर्चा होने लगी, सभी नदियों के जल को मंगवाया गया। लेकिन मुनि वशिष्ठ को पता था कि आगे क्या होने वाला है। लेकिन किसी से कुछ भी नहीं कहा। राम ने माता कैकई से कहा में दुष्टों के विनाश करने आया हूं और आप मेरे लिए वरदान मांगों क्योंकि माता कौशल्या एवं पिता इस बात को मानेंगे नहीं इसलिए आप ही मेरे लिए चौदह वर्ष का वनवास एवं भाई भरत को राजगद्दी। अवध में विरह की ओर कथा जाने लगी। उन्होंने कहा कि जहां कामना होती है वहां प्रेम नहीं होता और जहां प्रेम होता वहां कामना नहीं होती। यज्ञ भगवान की जहां स्थापना होती है। वहां समस्त तीर्थ एवं समस्त देवता स्वयं विराजमान होते हैं। श्रोताओं ने भगवान की कथा सुनकर धर्म लाभ लिया।



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