अमर उजाला ब्यूरो
केस एक- जनवरी 2022 में मोंठ इलाके में अज्ञात युवती की मौत की वजह साफ न होने से शव का विसरा सुरक्षित रखा गया था। इसको जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया लेकिन, अभी तक इसकी रिपोर्ट तैयार नहीं हुई। इस वजह से युवती की मौत की वजह साफ नहीं हो सकी।
केस दो- 4 मार्च 2022 रक्सा के बाजना गांव में शिकार खेलने पहुंचे शाहनवाज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद विसरा सुरक्षित रखा था लेकिन, इसकी रिपोर्ट भी आज तक सामने नहीं आई।
केस तीन- 18 अप्रैल 2022 को सीपरी बाजार के मेडिकल स्टोर संचालक राजकुमार सोनी की संदिग्ध परिस्थितियों में लाश रेलवे ट्रैक की झाड़ियों में मिली थी। इस मामले में भी पुलिस ने विसरा जांच के लिए सुरक्षित रखा लेकिन, इसकी रिपोर्ट भी सामने न आने से मौत का खुलासा नहीं हो सका है।
झांसी। बुंदेलखंड के 3658 लोगों की मौत का राज फॉरेंसिक लैब में बोतलों में बंद है। विसरा जांच रिपोर्ट न आने से मौत की वजह साफ नहीं हो पा रही है। करीब दो साल से मृतकों परिजन परेशान हैं। इधर बीच कई मामले ऐसे भी सामने आए हैं, जिनमें विसरा रिपोर्ट न होने से कोर्ट के हाथ भी बंधे हैं।
जिन मामलों में संदिग्ध मौत होती है। उसमें पोस्टमार्टम कराने के बाद डॉक्टर विसरा सुरक्षित करके पुलिस काे सौंप देते हैं। पुलिस इनको परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजती है। झांसी स्थित राजकीय प्रयोगशाला में झांसी मंडल, चित्रकूट मंडल एवं कानपुर मंडल से आए विसरा का परीक्षण होता है। आंकड़ों के मुताबिक यहां कुल 3658 मामलों में विसरा जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया, लेकिन जांच की रफ्तार काफी धीमी होने से समय पर रिपोर्ट तैयार नहीं हो पा रही है।
इनमें से कई विसरा तो दो साल से ज्यादा पुराने होने से बोतलों में रखे-रखे सड़ तक चुके हैं। बताया जा रहा है कि जितने विसरा का निस्तारण होता है, उससे कहीं अधिक रोजाना यहां विसरा आ जाते हैं। वहीं, फॉरेंसिक प्रयोगशाला निदेशक डाॅ. भूरी सिंह का कहना है पिछले कई सालों के मुकाबले संरक्षित विसरा में काफी कमी आई है। अब अधिकांश मामले सिर्फ दो साल से लंबित हैं। इनको भी पूरा किया जा रहा है।
झांसी समेत पूरे बुंदेलखंड के विसरा का होता है परीक्षण
झांसी स्थित फॉरेंसिक प्रयोगशाला में झांसी मंडल के झांसी, ललितपुर, उरई, चित्रकूट मंडल के चित्रकूट, हमीरपुर, बांदा, महोबा समेत कानपुर मंडल से आए विसरा का परीक्षण होता है। सबसे अधिक झांसी मंडल के मामले ही लंबित बताए जा रहे हैं।
इन मामलों की होती है विसरा जांच
शराब से हुई मौत, जहरखुरानी या फिर ऐसा मामला जिसमें मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सके। इनके खुलासे के लिए विसरा जांच कराई जाती है। छोटी आंत, आंत लीवर, गुर्दे के अंश को जांच के लिए भेजा जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार विवादों से बचने के लिए भी डॉक्टर विसरा सुरक्षित रखने को कह देते हैं।
एक विसरा जांचने में लगते हैं सात दिन
विशेषज्ञों के मुताबिक विसरा जांच की प्रक्रिया काफी लंबी एवं पेचीदा होती है। एक विसरा का नमूना जांचने में करीब सात दिन लगते हैं। तब जाकर उसकी रिपोर्ट तैयार होती है। इस वजह से एक समूह में सात-आठ विसरा का एक साथ परीक्षण कराया जाता है। झांसी में सात विशेषज्ञों की टीम विसरा परीक्षण करती है। विसरा जांचने को आगरा एवं लखनऊ में भी प्रयोगशाला है।
यह होता है विसरा
– मृतक के लीवर का टुकड़ा
– किडनी
– तिल्ली
– आमाशय
– छोटी आंत का टुकड़ा
