
ओजोन सिटी की जर्जर सड़क
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अलीगढ़ में ओजोन सिटी की सड़क को लेकर सियासी हलचल हो रही है। इसका निर्माण सपा शासनकाल में एडीए से स्वीकृत हुआ और सात करोड़ की लागत से 2017 में निर्माण हुआ। छह माह में सड़क टूट गई। दो टुकड़ों में इसका निर्माण दो एजेंसियों ने किया था। वर्ष 2018 में निर्माण की घटिया गुणवत्ता पर भाजपा विधायक अनिल पाराशर ने सवाल उठाया। शासन स्तर पर शिकायत की गई। जिसकी जांच कमिश्रर को सौंपी गई।
कमिश्रर स्तर से मामले में आरईएस व गंग नहर विभाग के दो अभियंताओं की जांच टीम बनाई गई। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट कमिश्रर को सौंपते हुए उल्लेख किया कि सड़क इतनी जल्दी टूट गई है। इससे घटिया निर्माण, निर्माण कार्य में अनदेखी परिलक्षित होती हैं। इस रिपोर्ट को आधार बनाकर कमिश्रर ने एडीए वीसी को कार्रवाई के लिए कहा।
पिछले वर्ष मई माह में निर्माण से जुड़ी ठेका एजेंसी के संचालकों व संबंधित अभियंताओं से जवाब तलब किया गया। तत्कालीन वीसी की ओर से कहा गया कि दोनों स्तरों से 15 दिन में जवाब दिया जाए। इसके बाद आगे कार्रवाई की जाएगी। मई 2022 में हुई जवाब तलबी पर आज तक कोई जवाब नहीं मिला और कार्रवाई भी केवल औपचारिकता तक सिमट गई। सवाल ये भी है कि भाजपा नेता पांच साल में इस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं करा सके।
मरम्मत तक नहीं कराई
पिछले वर्ष तत्कालीन मंडलायुक्त व एडीए वीसी के स्तर से यह भी तय किया गया कि इसकी मरम्मत पर कितना खर्च होगा, यह जान लिया जाए। इस पर पीडब्ल्यूडी ने अपनी रिपोर्ट में सवा करोड़ से मरम्मत का उल्लेख किया। फिर सवाल उठा बजट कहां से आएगा। बजट जुटाने की जगह इसको ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
