चित्रकूट जिले में तंत्र-मंत्र के चक्कर में परिवार को घर के अंदर कैद रखने वाले नमकीन व्यापारी काशी प्रसाद की मानसिक स्थिति में कुछ सुधार हुआ है। उधर, प्रयागराज में भर्ती पत्नी व पुत्र-पुत्री को भी डाक्टरों ने तीन दिन की दवा देकर अस्पताल से घर भेज दिया है। परिजन प्रयागराज में ही अपने रिश्तेदार के घर ठहरे हैं।
तरौंहा कस्बे में इस घटना की दिनभर चर्चा रही। दोपहर को व्यापारी अपने पिता से घर की चाभी लेकर फिर उसी घर में पहुंच गया। सदर कोतवाली क्षेत्र के तरौंहा दुर्गाकुंज निवासी नमकीन व्यापारी काशी प्रसाद केशरवानी को घर के अंदर से पत्नी पूनम, पुत्र रजत, पुत्री अर्शिता को पुलिस व चाइल्ड लाइन की टीम ने बाहर निकाला था।
बताया गया है कि चार वर्षों से व्यापार में घाटा लगने के कारण तंत्र-मंत्र के सहारे धन कमाने की लालच में यह परिवार घर के अंदर कैदियों की तरह रहता था। इन सभी को जिला अस्पताल से प्रयागराज रेफर किया गया था। पुलिस ने घर में तालाबंद कर व्यापारी के पिता को चाभी सौंप दी थी।
गंदगी वाले घर में ही लौटा काशी
घर की सफाई कराने के निर्देश दिए थे। शनिवार की दोपहर को प्रयागराज से लौटे काशी प्रसाद ने अपने पिता बद्री प्रसाद के पास जाकर घर की चाभी ली। बार-बार मना करने के बावजूद गंदगी व बदबू से भरे उसी घर में काशी प्रसाद चला गया। वहां अभी भी तंत्र-मंत्र की सामग्री का ढेर लगा हुआ है।
पत्नी और बच्चे प्रयागराज में ही रूके
चाइल्ड लाइन के समन्वयक विशेष त्रिपाठी ने बताया कि प्रयागराज में व्यापारी की पत्नी व बच्चों की काउंसलिंग कराकर दवा कराई गई है। उनकी मानसिक रोग विशेषज्ञ व मनो वैज्ञानिक से काउंसलिंग कराई गई है। वह सब प्रयागराज में अपने मौसी के घर रुके हैं। तीन दिन बाद डॉक्टरों ने उन्हें फिर अस्पताल बुलाया है।
पिता व अन्य परिजनों को दिए गए निर्देश
कोतवाली के एसआई प्रवीण सिंह ने बताया कि काशी प्रसाद को उसी घर में बिना सफाई कराए नहीं रहने दिया जाएगा। इसके लिए उसके पिता व अन्य परिजनों को निर्देश दिए गए हैं। बता दें कि मामले में आशंका है कि काशी किसी तांत्रिक के संपर्क में था। उसकी तलाश भी की जा रही है।
कारखाना बंद होने पर लिया तंत्र-मंत्र का सहारा
नमकीन के व्यापारी काशी ने चार साल पहले नया मकान बनवाकर कारखाना लगाया था। कुछ दिन बाद घाटा होने से कारखाना बंद हो गया। इसके कारण वह अंधविश्वास में फंसकर तंत्र मंत्र के सहारे अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के फेर में पड़ गया। परिवार के साथ खुद को मकान तक सीमित कर लिया।
