यात्रियों को भुगतना पड़ता है खामियाजा, अनाधिकृत लोग घुस आते हैं कोचों में
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। झांसी रेल मंडल टिकट चेकिंग स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। हालात यह हैं कई ट्रेनें एक टीटीई के भरोसे दौड़ रही हैं। इससे यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। टिकट की जांच न हो पाने से लोग अनाधिकृत रूप से स्लीपर व एसी कोचों में घुस जाते हैं। इससे इन कोचों के यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ती है। आए दिन यात्रियों की ओर से यह समस्या उठाई जाती है।
झांसी रेल मंडल के झांसी, ग्वालियर, बांदा, खजुराहो, उरई व ललितपुर स्टेशन से टिकट चेकिंग स्टाफ की ड्यूटी लगाई जाती है। मंडल में इनके 1250 पद स्वीकृत हैं, लेकिन कार्यरत 650 ही है। कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने की वजह से यह संख्या लगातार घटती जा रही है। कमी के चलते जिन ट्रेनों में पांच टीटीई की ड्यूटी लगाई जाती थी, उनमें अब दो से काम चलाया जा रहा है। कई ट्रेनें तो ऐसी हैं, जिनके यात्रियों के टिकट की जांच की जिम्मेदारी एक ही टीटीई के भरोसे छोड़ दी जाती है।
इसका सबसे ज्यादा खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ता है। सीट को लेकर किसी तरह का विवाद होने की स्थिति में उनके लिए ट्रेन में टीटीई को खोजना मुश्किल पड़ जाता है। इसके अलावा जनरल टिकट लेकर यात्रा करने वाले तमाम यात्री अनारक्षित कोच में जगह न मिलने पर स्लीपर व एसी कोचों में दाखिल हो जाते हैं और अक्सर बगैर किसी जांच के वे गंतव्य तक पहुंच जाते हैं। इससे कई-कई दिन पहले से रिजर्वेशन कराकर यात्रा कर रहे लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। साथ ही उन्हें सामान चोरी होने का भी खतरा बना रहता है।
टिकट चेकिंग स्टाफ के कई पद खाली चल रहे हैं। हालांकि, जल्द ही कुछ कर्मचारियों का पैनल मिलने वाला है। वहीं, यात्रियों की टिकट की स्टेशनों के निकासी द्वार पर चेकिंंग की जाती है।
– शशिकांत त्रिपाठी, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक
