माताटीला बांध की तलहटी में स्थित उद्यान का होगा जीर्णोद्धार
71.61 लाख रुपये से कराया जाएगा काम
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। उपेक्षा का शिकार रहे माताटीला बांध की तलहटी में स्थित उद्यान का अब 1.35 करोड़ से जीर्णोद्धार किया जाएगा। शासन ने इसके लिए सिंचाई विभाग की कार्ययोजना को प्रशासकीय व वित्तीय स्वीकृति दे दी है। उद्यान में फिर से गुलाब वाटिका महकेगी। सतरंगी फव्वारे भी दिखेंगे।
बुंदेलखंड का गौरव कहे जाने वाले माताटीला बांध का निर्माण 1958 के करीब बेतवा नदी पर हुआ था। बांध करीब 35 मीटर ऊंचा और 6300 मीटर के करीब लंबा है। इसका पूर्ण जलस्तर 308.45 मीटर और न्यूनतम जलस्तर 295.66 मीटर है। बांध में कुल 23 गेट लगे हैं। जिसके माध्यम से पानी की निकासी की जाती है।
बांध की तलहटी में ही एक उद्यान बनाया गया था। जिसमें कई एकड़ भूमि में एक गुलाब वाटिका और तलैया बनाई गई थी। इसके आकर्षण को देखने के लिए जनपद सहित झांसी और मध्य प्रदेश के जनपदों के लोग भी यहां आते थे। लेकिन, सिंचाई विभाग के अधिकारियों की उपेेक्षा के चलते धीरे-धीरे इस उद्यान ने अपनी पहचान खो दी। नतीजा यह हुआ था कि जो उद्यान कभी हरा-भरा और फूलों से गुलजार रहता था वहां पर अन्ना मवेशी दिखाई देने लगे थे। इससे गुलाब वाटिका का अस्तित्व ही समाप्त हो गया।
कुछ माह पूर्व सिंचाई विभाग के द्वारा इस उद्यान की पुन: स्थापना के लिए एक कार्ययोजना तैयार की गई और शासन को स्वीकृति के लिए भेज दी गई। हाल ही में शासन ने इसके लिए 1.35 करोड़ रुपये की कार्ययोजना को वित्तीय और प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर दी। इस वित्तीय वर्ष में इस उद्यान में 71.61 लाख रुपये से काम कराया जाएगा। इसके बाद शेष धनराशि को शासन दूसरी किस्त के रूप में जारी करेगा।
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सतरंगी लाइटों को देखने के लिए जुटते पर्यटक
माताटीला बांध स्थित उद्यान में कई फव्वारे लगे थे। इस पर सतरंगी लाइटों को देखने के लिए काफी लोग पहुंचते थे। यहां रंग-बिरंगी लाइट सिस्टम को सप्ताह में दो दिन चलाया जाता था। उधर, माताटीला बांध में 1964-65 में जल विद्युत उत्पादन गृह की स्थापना की गई थी। यहां पर विद्युत उत्पादन के लिए 10-10 मेगावॉट की तीन टर्बाइन स्थापित कराई गई थीं। टर्बाइन के माध्यम से बिजली का उत्पादन किया जाता है।
माताटीला बांध पर स्थित उद्यान के लिए बनाई गई कार्ययोजना को शासन से वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है। शासन से धनराशि जारी होने के बाद काम शुरू करवा दिया जाएगा।
-इं. मोहम्मद फरीद, अधिशासी अभियंता माताटीला बांध
