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कूनो नेशनल पार्क से छोड़े गए थे नर और मादा चीते, नर पहले ही लौट आया था

चार दिन पूर्व जनपद से सटे मध्यप्रदेश के जंगलों मिली थी मादा चीता आशा की लोकेशन

संवाद न्यूज एजेंसी

ललितपुर। अपने साथी के साथ जीने की हसरत सिर्फ इंसानों में ही नहीं होती, जानवर भी इस अपनत्व को बखूबी समझते हैं। इसका ताजा उदाहरण कूनो नेशनल पार्क से विचरण के लिए छोड़े गए नर और मादा चीते पवन और आशा हैं। माना जा रहा है कि ये दोनों जंगल में अलग हो गए थे, ऐसे में जहां पवन आशा को ढूंढते हुए कुछ दिन पहले ही कूनो लौट गया था। वहीं, अब आशा भी उसे खोजते हुए कूनो लौट आई है।

कूनो नेशनल पार्क से छोड़े जाने के बाद झांसी के रास्ते जनपद की ओर आने वाली मादा चीता आशा के वापस पार्क में पहुंचने की खबर से वनाधिकारियों ने राहत की सांस ली है। विगत पांच दिनों से चीते की लोकेशन को लेकर वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी काफी परेशान थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर नामीबिया से भारत लाए गए चीतों को मध्य प्रदेश स्थित कूनो नेशनल पार्क में रखा गया था। लेकिन, अपने अनुकूल वातावरण न मिलने के कारण कई चीते बीमार हो गए, तो वहीं कुछ की मौत भी हो गई थी। ऐसे में उच्च स्तर पर चीतों को खुला छोड़कर अपने अनुकूल स्थान की तलाश करने देने पर सहमति बनी थी, इसलिए दो चीतों नर पवन और मादा आशा को एक साथ पार्क से खुला छोड़ दिया गया था। दोनों चीतों की निगरानी सेटेलाइट के माध्यम से की जा रही थी।

एक महीने पहले शिवपुरी के जंगलों में इन नर व मादा चीतों की लोकेशन मिली थी। कुछ समय पहले इन चीतों की लोकेशन ललितपुर की ओर दिखाई दे रही थी। इससे वन विभाग ने सीमावर्ती इलाकों में इनकी चौकसी बढ़ा दी थी। इसके साथ ही इन क्षेत्रों में ग्रामीणों को सचेत कर दिया था। साथ ही झांसी व मध्य प्रदेश से सटे इलाकों में वन कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई थी। इस दौरान पता चला कि नर चीता पवन कूनो लौट गया।

उधर, बुधवार को जैसे ही वन विभाग के अधिकारियों को यह सूचना मिली कि मादा चीता आशा जिसकी लोकेशन जनपद में आसपास मध्य प्रदेश जंगलों में दिखाई दे रही थी, वह वापस कूनो नेशनल पार्क पहुंच गई है, अधिकारियों ने राहत की सांस ली, क्योंकि वन विभाग चीतों की सुरक्षा और कोई हादसा न हो इसे लेकर काफी संजीदा था। वहीं, अब इस बात की चर्चा हो रही कि अपने साथी पवन को ढूंढते हुए आशा खुद ही कूनो लौट गई है।

कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ से वार्ता हुई है, उन्होंने चीतों की लोकेशन वापस पार्क में ही बताई है। जनपद सीमा की ओर अब कोई भी चीता कूनो पार्क से नहीं आ रहा है।

-गौतम सिंह, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी।



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