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बांदा। समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद बंद हो गई है। इस बार पांच सालों में सबसे कम लक्ष्य के सापेक्ष 11.67 फीसदी ही गेहूं की खरीद हुई है। नैफेड के क्रय केंद्रों में बोहनी तक नहीं हुई। वजह खुले बाजार में गेहूं के दाम सरकार के समर्थन मूल्य से अधिक होना रहा है।

इस बार समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद पहली अप्रैल से शुरू हो गई थी। शासन ने जनपद में गेहूं खरीद का लक्ष्य 72,000 मीट्रिक टन तय कर दिया था। गेहूं की खरीद के लिए जनपद में 80 क्रय केंद्र खाले गए थे।

शुरुआत से ही गेहूं के दाम बाजार से अधिक होने से किसानों ने क्रय केंद्र का रुख नहीं किया। इक्का-दुक्का किसानों ने ही क्रय केंद्रों में गेहूं बेचा। आलम यह रहा कि ढाई माह में जिले के 72 क्रय केंद्रों में 8403.919 मीट्रिक टन ही खरीद हो सकी। खाद्य विभाग 1800.55, पीसीएफ ने 5325.05, भारतीय खाद्य निगम ने 380.008, यूपीएसएस 898.316 मीट्रिक टन खरीद की।

विपणन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में पिछले पांच सालों में सबसे कम गेहूं की खरीद हुई। 2017-18 में 51205, 2018-19 में 70439, 2019-20 में 56000, 2021-22 में 67619 मीट्रिक टन खरीद हुई थी।

प्रभारी जिला विपणन अधिकारी समीर का कहना है कि गेहूं खरीद की ऐसी स्थिति कभी नहीं हुई। बाजार में दाम समर्थन मूल्य से अधिक होने के कारण किसान गेहूं बेचने के लिए क्रय केंद्रों पर नहीं पहुंचा। काफी प्रयासों के बाद 11 फीसदी की ही खरीद हो पाई है।



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