बांदा। जेल में बंद चार आरोपियों का मई 2022 को मुंबई की विशेष अदालत से निकला वारंट अभी तक जेल प्रशासन के पास नहीं पहुंचा। वारंट के बाद भी तीन आरोपियों को रिहा करने के मामले में कोर्ट के आदेश पर जेल महानिरीक्षक लखनऊ ने बांदा जेल अधीक्षक सहित पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं। जेल में बंद चारों आरोपी महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत वांटेड थे। मुबई की विशेष अदालत ने वारंट जारी कर आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बांदा कारागार अधीक्षक को आदेश दिए थे।
शहर के स्टेशन रोड में 13 जनवरी 2017 को पंजाब आर्मरी में शस्त्र लूट कांड को अंजाम देने वाले पांच आरोपी बांदा जेल में बंद थे। इनमें चार आरोपी मोहम्मद सलमान कुरैशी, संजय सालुंके, वाजिद शाह और आमिर रफीक शेख महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत वांटेड थे। मुंबई की विशेष अदालत ने इनके विरुद्ध मई 2022 को वारंट जारी कर कारागार अधीक्षक बांदा को कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए थे, लेकिन जेल अधिकारियों ने उन्हें कोर्ट में पेश नहीं किया।
कोर्ट ने 12 जून 2022 को बांदा कारागार अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस भेजा, इसमें कहा कि क्यों न उनके विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाए। इसके बाद भी बांदा जेल के अधिकारियों ने आरोपियों की कोर्ट में न तो वीडिगो कांफ्रेसिंग से पेशी कराई और न ही व्यक्तिगत रूप से पेश किया। शस्त्र लूट कांड में जमानत मिलने के बाद जेल ने मोहम्मद सलमान कुरैशी, संजय सालुंके, वाजिद शाह को 22 जून व 29 जून को रिहा कर दिया।
कोर्ट ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जेल महानिरीक्षक (लखनऊ) को जांच व कार्रवाई के आदेश दिए हैं। डीजीपी जेल ने तीन सदस्यीय टीम गठित कर जांच के आदेश दिए हैं। इधर, कारागार अधीक्षक वीरेश राज शर्मा का कहना है कि मामला 2022 का है। आरोपियों की पत्रावली में मुंबई की विशेष अदालत का कोई वारंट नहीं है।
वारंट कहां गया, इसकी जांच होनी चाहिए। बताया कि इसकी जानकारी जब उन्हें हुई तो जेल में बंद एक आरोपी आमिर को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश कर दिया है।
