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पठानकोट एक्सप्रेस से पति व चार साल की बेटी के साथ दिल्ली जा रही थी महिला, झांसी से गाड़ी छूटने के तीन मिनट बाद दिया बेटे को जन्म

यात्रियों के चेन खींचने से रेलवे पुल पर रुक गई ट्रेन

प्रसूता को चिकित्सा सुविधा पहुंचाने के लिए ट्रेन को वापस झांसी रेलवे स्टेशन लाया गया

अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। यूं तो रेलवे की व्यवस्था में कई खामियां हैं, लेकिन फिर भी रेलवे ने शुक्रवार को जो किया, उसके लिए वह बधाई का पात्र है। असल में रेलवे के इतिहास में शायद ऐसा पहली बार हुआ है कि जनरल कोच में सफर कर रही एक गर्भवती ने चलती ट्रेन में बच्चे को जन्म दिया हो और उसे तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए रेलवे ने स्टेशन से छूट चुकी ट्रेन को वापस स्टेशन बुलाया हो। ये वाकया झांसी रेलवे स्टेशन का है, यहां पठानकोट एक्सप्रेस में बच्चे का जन्म होने के बाद ट्रेन को वापस झांसी स्टेशन लाया गया। जच्चा-बच्चा को तुरंत मेडिकल कॉलेज भेजा गया। हालांकि इस कारण से ट्रेन भी लेट हुई लेकिन, जब यात्रियों को सच्चाई बता चली तो उन्होंने रेलवे को खूब बधाई दी।

चंदौली निवासी सीनू यादव अपनी गर्भवती पत्नी मनीषा यादव (23) और चार साल की बेटी के साथ शुक्रवार को पठानकोट एक्सप्रेस में सफर कर रहे थे। वे ट्रेन के जनरल कोच में बैठे थे और दिल्ली की ओर जा रहे थे। ट्रेन रात 8:50 बजे झांसी स्टेशन पर पहुंची और 13 मिनट के ठहराव के बाद 9:03 बजे दिल्ली के लिए रवाना हो गई। गाड़ी के चलते ही मनीषा को प्रसव पीड़ा होने लगी।

इससे पहले कि कोई कुछ कर पाता उसने ट्रेन में ही बेटे को जन्म दे दिया। लेकिन, तब तक ट्रेन स्टेशन से तकरीबन आधा किलोमीटर आगे बढ़कर चित्रा चौराहे के पास रेलवे पुल पर पहुंच चुकी थी। उधर, ट्रेन में प्रसव हुआ देख सहयात्रियों ने तत्काल जंजीर खींचकर गाड़ी को रोक दिया और इसकी सूचना रेलवे के कंट्रोल रूम पर दी।

सूचना मिलते ही उप स्टेशन प्रबंधक (वाणिज्य) एसके नरवरिया ने तुरंत स्टेशन पर मौजूद रेलवे के चिकित्सक से संपर्क किया। चूंकि, गाड़ी आउटर पर रेलवे ब्रिज के ऊपर खड़ी हुई थी, ऐसे में रेलवे की टीम का कोच तक पहुंचना आसान नहीं था। साथ ही इसमें समय भी काफी जाया हो जाता। इस पर गाड़ी पीछे लौटाई गई। ऐसे में 9:35 बजे गाड़ी वापस झांसी स्टेशन पर पहुंच गई। यहां डा. रविंद्र चौधरी, नर्स अरुणा व आया राजकुमारी ने तत्काल जच्चा-बच्चा को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया। इसके बाद प्रसूता को आरपीएफ टीम के साथ एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। यहां जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।

बगैर टिकट यात्रा कर रहा था दंपती

झांसी। ट्रेन में बच्चे को जन्म देने वाली मनीषा अपने पति सीनू और चार साल की बेटी के साथ बगैर टिकट यात्रा कर रही थी। इसकी जानकारी तब हुई जब रेलवे के रिकॉर्ड में ब्योरा दर्ज करने के लिए उनसे टिकट मांगा गया। वे टिकट नहीं दिखा पाए। हालांकि, रेलवे की ओर से टिकट के मसले को दरकिनार करते हुए मां-बेटे को प्राथमिकता के साथ इलाज उपलब्ध कराया।

स्ट्रेचर पर चादर न होने से सहयात्रियों ने मुश्किल से खोला कोच का गेट

झांसी। पठानकोट एक्सप्रेस के वापस स्टेशन पर पहुंचने से पहले ही प्लेटफार्म पर डिप्टी एसएस एसके नरवरिया और रेलवे अस्पताल की टीम स्ट्रेचर के साथ पहुंच गई थी। स्ट्रेचर पर चादर नहीं बिछा था। इस पर सहयात्री भड़क गए और वे कहने लगे कि स्ट्रेचर पर चादर बिछवाने के बाद वह दरवाजा खोलेंगे। इस पर उन्हें समझाया गया कि बाहर एंबुलेंस खड़ी हुई है, जिससे महिला को अस्पताल भेजा जाना है। काफी समझाने के बाद यात्रियों ने दरवाजा खोला।

59 मिनट बाद दोबारा रवाना हुई ट्रेन

झांसी। पठानकोट एक्सप्रेस रात 8:50 बजे झांसी के वीरांगना लक्ष्मीबाई स्टेशन पर पहुंची थी और 9:03 बजे रवाना हो गई थी। प्रसव होने की वजह से गाड़ी को दोबारा स्टेशन पर लाया गया। गाड़ी 9:35 बजे स्टेशन पर पहुंची। इसके बाद 22:02 बजे दोबारा दिल्ली के लिए रवाना हुई। इससे गाड़ी 59 मिनट की देरी से रवाना हुई।



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