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Son has been martyred in Kargil 24 years ago

शहीद बेटे प्रेम पाल सिंह के तस्वीर के साथ मां
– फोटो : अनमाोल शर्मा

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एक मां का बेटा कारगिल युद्घ में 24 साल पहले देश के लिए शहीद हो गया, पर वह मां आज भी अपने लाड़ले को जिंदा मानती है। बेटे के लिए रोज खाना बनाती है और उसकी तस्वीर को खिलाती है। रात में सोने के लिए बिस्तर लगाती है और बेटे की तस्वीर के पास ही सो जाती है।

शहीद प्रतिमा

कारगिल की चोटी पर पाकिस्तानी घुसपैठियों को धूल चटा कर भारत का तिरंगा लहराकर फतह करने वाले रणवाकुरों में अलीगढ़ की इगलास तहसील में गोरई क्षेत्र के गांव खेमकवास का शहीद प्रेमपाल सिंह शामिल हैं। प्रेमपाल सिंह साहस और पराक्रम की असाधारण नजीर बन गए हैं। इनकी बहादुरी पर आज भी पूरा गांव गर्व करता है। शहीदों ने मातृभूमि का कर्ज अपने प्राण देकर चुकाया। इनका त्याग और समर्पण न तो भारत मां भूलेगी और न ही जन्म देने वाली मां। 

शहीद का बिस्तर

रोज लगाती है बेटे के लिए खाने की थाली, सजाती है बिस्तर 

मां वीरवती देवी अपने बेटे प्रेमपाल सिंह की याद में आंखे भर लाती है। बेटे के लिए हर रोज दोनों वक्त खाने की थाली परोसती है। बेटे की तस्वीर के सामने रखकर अपने हाथो से भोग लगाती है। बेटे को बिना भोजन कराए, भोजन नहीं करती। वह बताती हैं कि उनका बेटा प्रेमपाल सिंह आज भी जिन्दा है। शाम को खाना खिलाने के बाद मां बेटे के लिए चारपाई पर बिस्तर लगाती है और तस्वीर के पास ही सोती है।



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