बानपुर। कस्बे में चल रहे चातुर्मास के दौरान मुनि विनत सागर महाराज ने भक्तामर प्रशिक्षण शिविर में 12वें काव्य को समझाते हुए कहा कि शरीर की शोभा गुणों से होती है न की आभूषणों से। शरीर की कीमत तब तक है जब तक आत्मारूपी गुण लगे हुए हैं, जिस दिन ये आत्मारूपी गुण प्रकट हो जाएंगे उस दिन ये शरीर छूट जाएगा। शरीर की सुंदरता ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगी।
मुनिश्री ने कहा कि अगर हमें भगवान बनना है तो हमें भगवान जैसे परिणाम भी बनाने होंगे। जैसी हमारी पर्याय होगी वैसी हमारी मति होगी। जैसी हमारी गति होगी और जैसे हमारे भाव होंगे वैसे ही हमारे भाव बढ़ते चले जाएंगे। इस अवसर पर आचार्य विनम्र सागर महाराज का पूजन और दोनों संतों का पाद प्रक्षालन कर शास्त्र भेंट किया गया। कार्यक्रम स्थल पर महेंद्र कुमार नायक अध्यक्ष जैन समाज, वीरेंद्र कुमार सिंघई, प्रमोद सराफ, प्रदीप कुमार मड़वैया सहित महिलाएं व श्रद्धालु मौजूद रहे।
