ललितपुर। जिला अस्पताल में होने वाले पुलिस चिकित्सकीय परीक्षण की रिपोर्ट अब पुलिस को बंद लिफाफे में दी जाएगी। इससे पहले पुलिस चिकित्सकीय परीक्षण के लिए जिन पीड़ितों को अस्पताल भेजती थी, उनकी रिपोर्ट पुलिसकर्मियों को खुले में दे दी जाती है, जिससे चिकित्सकीय रिपोर्ट की गोपनीयता भंग हो रही थी। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने इमरजेंसी चिकित्सकों को आदेश जारी किए हैं, कि अब किसी भी दशा में ऐसा न किया जाए।
पुलिस के पास आने वाले लड़ाई व घायलों के मेडिकल परीक्षण की जिला चिकित्सालय मजरूमी चिट्ठी के माध्यम से भेजा जाता रहा है। कई मामलों में देखा गया है कि विवेचक को अस्पताल में कराए मेडिकल परीक्षण की रिपोर्ट ही प्राप्त नहीं होती है। कई मामलाें में पुलिस जो प्रति अस्पताल से जारी होती है, सीधे न्यायालय में लगाई पेश की जाती है। जबकि पुलिस के पास उसका ब्योरा नहीं मिलता है।
सबसे ज्यादा परेशानी होती है, तो उन मामलों में होती जिनमें चिकित्सकों ने एक्सरे व अन्य मेडिकल जांच की सलाह दी हो, बाद में मुकदमें के ट्रायल के समय उसकी रिपोर्ट न्यायालय में नहीं मिल पाई। क्योंकि पुलिस गार्ड से सेंटिंग कर जांच के लिए जो पर्ची चिकित्सक पुलिस को देता है, वह मरीज ले जाकर प्राइवेट में जांच करा लेता है, यही नहीं अपने निजी वकील को कोर्ट में खड़ा कर जांच पत्रावली प्रस्तुत कर देता है। इसके बाद पुलिस विवेचना में इन रिपोर्ट को शामिल नहीं कर पाती है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी रहेगी सील पैक
पोस्टमार्टम की एक प्रति पुलिस को सुपुर्द कर दी जाती है, साथ ही एक प्रति स्वास्थ्य विभाग के पास होती है। कई पीड़ित इन रिपोर्ट की छायाप्रति न्यायालय में प्रस्तुत कर देते हैं। ऐसे में जब कभी न्यायालय में पीड़ित के पास मौजूद रिपोर्ट की जांच-पड़ताल करता था, तो उसमें चिकित्सालय प्रशासन का नाम उजागर हुआ। जिसमें चिकित्सालय प्रशासन को न्यायालय में सफाई देने के लिए जाना पड़ा रहा है।
मेडिकल रिपोर्ट का दुरुपयोग न हो सके, इसके लिए बंद लिफाफे में भेजने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए सभी मेडिकल ऑफीसरों को लिखित आदेश जारी किया गया है। साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट को सील बंद रखा जाएगा। – डॉ राजेंद्र प्रसाद, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक जिला अस्पताल
