ललितपुर। पुलिस अधीक्षक अभिषेक कुमार अग्रवाल को आखिरकार चार महीने में ही चलता होना पड़ा। वह शिकायतों को दूर नहीं कर पा रहे थे। जनसुनवाई भी नहीं हो रही थी। सूबे में आईजीआरएस पर होने वाली जनसुनवाई में ललितपुर खिसककर 67वें नंबर पर पहुंच गया। पुलिस में सुनवाई न होेने से नाराज युवक पिछले हफ्ते ही मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंच गया था। यहां उसने जहर खाकर जान देने की कोशिश की। इन सब मामलों को शासन ने गंभीरता लिया। इस वजह से एसपी को इतने कम समय के भीतर यहां से चलता होना पड़ा।
आईपीएस अभिषेक अग्रवाल को मार्च 2023 में ललितपुर भेजा गया था। इसके बाद से यहां भले ही कोई बड़ी वारदात नहीं हो लेकिन, पुलिस आम लोगोें की शिकायतें दूर करने में मददगार साबित नहीं हुई। जून माह की जारी रैंकिंग में ललितपुर सूबे में खिसकर 67 नंबर पर पहुंच गया। जनसुनवाई के मामले में लगातार पिछड़ने की शिकायत शासन तक भी पहुंची।
वरिष्ठ पुलिस अफसर तक ललितपुर पुलिस को आगाह करते रहे लेकिन, यहां पर पुलिस की कार्यशैली में कोई सुधार नहीं हुआ। पुलिस में सुनवाई न होने से दुखी होकर महरौनी निवासी पुष्पेंद्र 22 जुलाई को लखनऊ में मुख्यमंत्री के जनता दरबार कार्यालय पहुंच गया। यहां उसने जहर खाकर जान देने की कोशिश की। ललितपुर पुलिस की इस नाकामी को शासन ने गंभीरता से ले लिया। आखिरकार इसका खामियाजा आईपीएस अभिषेक अग्रवाल को भुगतना पड़ गया।
