बांदा। चचेरी भाभी के प्रेम प्रसंग को लेकर हुई हत्या के मामले मे तीन दोषियों को विशेष न्यायाधीश एससीएसटी अनु सक्सेना की अदालत में 14 वर्ष बाद आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही अन्य धाराओं मे सजा सहित कुल 89 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर 5-5 माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। तीनों दोषियों का सजायावी वारंट बनाकर जेल भेज दिया गया।
विशेष लोक अभियोजक विमल सिंह व डॉ. महेंद्र द्विवेदी ने बताया कि नरैनी थाना क्षेत्र के हजारीपुरवा बडेहा निवासी पार्वती ने 7 जनवरी 2009 को प्राथमिकी दर्ज करायी कि उसके पति अरुण का नाजायज संबंध उसके चाचा की बहू यानि चचेरी भाभी मुन्नी पति सजिवन से थी, जो कि उसकी जिठानी लगती थी।
इसी रंजिश के कारण सजीवन अपने चचेरे भाई अरुण से बुराई मानता था। छह जनवरी 2009 को पति अरुण नरैनी से बाजार लौट रहा था, तभी सजीवन उर्फ राम सजीवन पुत्र हल्के, रामरूप पुत्र जग्गू व रजोल पुत्र झग्गू व मोहन लोघ पुत्र भोला ने लाठी से अरुण के सर पर हमला किया। बेटे कृष्ण कुमार व उसे गांलियां दीं और अपमानित करते हुए धमकी दी।
सिर से अधिक खून निकलने से अरुण की मृत्यु हो गयी। सजीवन उर्फ राम सजीवन की छह जुलाई 2010 को मृत्यु हो गयी। मुकदमे में तीन लोगों के खिलाफ आरोप बनाया गया। साक्ष्यों व दलीलों को सुनने के उपरांत न्यायाधीश ने अपने 27 पृष्ठीय फैसले में तीनों को दोषी पाते हुए सजा सुनाई।
