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बांदा। निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर में आॅपरेशन किए जाने के मामले में सरकारी सर्जन की नौकरी पर भी तलवार लटक गई है। जिलाधिकारी ने जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है। जिसमें उन्होंने सर्जन को पूरी तरह से दोषी ठहराया है। इसके साथ ही जिस निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर में ऑपरेशन किया गया, उसका लाइसेंस भी जल्द बर्खास्त किया जा सकता है।

बिसंडा थानाक्षेत्र के चौसड़ गांव निवासी 29 वर्षीय कल्लू के पेट में दर्द की शिकायत पर घरवालों ने उसे निजी नर्सिंगहोम में भर्ती कराया, जहां लीवर में फोड़ा बताया गया। फिर परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां के सर्जन डॉ. रामेंद्र कुमार ने भर्ती मरीज का महाराणा प्रताप चौक के पास स्थित देव अल्ट्रासाउंड एवं यूनिक सोनोकेयर सेंटर ले जाकर ऑपरेशन किया था।

फिर जिला अस्पताल में भर्ती कर दिया। आरोप था कि सर्जन ने ऑपरेशन के 40 हजार रुपये लिए थे। चार अक्तूबर को ऑपरेशन के कुछ देर के बाद कल्लू के पेट में दोबारा दर्द हुआ। सर्जन को फोन कर सूचना दी गई तो उन्होंने प्राइवेट नर्सिंगहोम से एक्स-रे कराया। हालत और बिगड़ी तो कानपुर रेफर कर दिया। यहां तक खुद भी एंबुलेंस में थोड़ी दूर तक साथ गए।

बीच रास्ते मौत होते ही एंबुलेंस से उतर कर लौट आए। कानपुर में डाक्टरों ने देखते ही मरीज को मृत घोषित दिया था। आरोप था कि गलत ऑपरेशन से मौत हुई है। उसके बाद अल्ट्रासाउंड सेंटर, एसपी व डीएम कार्यालय क बाहर परिजन शव लेकर पहुंचे।

इस मामले में नगर मजिस्ट्रेट और एसीएमओ की कमेटी बनाकर डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने जांच कराई। जांच में सर्जन लगे आरोपों के अनुसार दोषी पाए गए। डीएम ने बताया कि जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। वहां से निर्देश मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। अल्ट्रसाउंड सेंटर पर कार्रवाई भी जल्द होगी।



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