मुहम्मदाबाद। सर्दियों की दस्तक शुरू हो गई है। सुबह-शाम लोगों को ठंडक का एहसास होने लगा है। ऐसे में ठंड को देखकर वह परिवार परेशान है, जिनके पास सिर ढकने की जगह नहीं है।
डकोर क्षेत्र में पिछले महीने हुई बरसात के कारण कुछ गरीब परिवारों के कच्चे घर जमींदोज हो गए थे। जिन्हें मदद न मिलने पर ऐसे परिवार झोपड़ी और पन्नी डालकर जीवन यापन करने को मजबूर हैं। गांव में करीब दर्जन भर ऐसे लोग है, जो पन्नी के सहारे जीवन यापन कर रहे हैं और एक छत की तलाश में परेशान हो रहे हैं।
गांव के अनिल की माली हालत ठीक नहीं है। अनिल मजदूरी करके पेट पाल रहे हैं। कच्चा घर जीर्णशीर्ण है। सोते समय चिंता लगी रहती है कि न जाने कब घर भरभरा जाए। अनिल का कहना है कि मजदूरी करके घर का निर्माण करना मेरे लिए सपने जैसा है। इसी तरह
लल्लूराम के रिहायशी घर की मजबूती ठीक नहीं है। लल्लूराम कहते हैं कि आवास बनाने के लिए उन्हें सिर्फ आश्वासन दिया गया है। न तो कोई सर्वे करने आया है और न ही कोई लाभ मिला है। वे कहते हैं कि सर्दियों में आवासविहीन गरीब ठंड में बेहद परेशान होंगे।
परियोजना निदेशक डॉ. शिवाकांत द्विवेदी का कहना है कि जो व्यक्ति सूची से छूट गए हैं। उनके लिए नए सिरे से सर्वे कराकर आवास योजना का लाभ दिलाया जाएगा। इसके लिए संबंधित बीडीओ के माध्यम से रिपोर्ट मांगी जाएगी।
मुहम्मदाबाद निवासी स्वर्गीय बड़े की पत्नी शबीना के पास आसरा नहीं है। छोटे चार बच्चों का साथ और कीड़े-मकोड़ों के डर के बीच पन्नी डालकर गुजर-बसर कर रहीं हैं।
शबीना का कहना है कि पति के स्वर्गवास के बाद गुजारा करना बड़ा मुश्किल हो गया है। बीते दिनों बरसात में कच्चा घर भी ढह गया। अब झोपड़ी पर पन्नी डालकर समय काट रहे हैं।
बृजमोहन और उनकी पत्नी सोनम अहिरवार का भी घर बारिश की भेंट चढ़ गया।
आर्थिक स्थिति ठीक न होने से दंपती टूटे-फूटे घर पर पन्नी डालकर जीवन यापन कर रहे हैं। सोनम का कहना है कि उन्हें एक योजना के तहत आवास निर्माण के लिए सर्वे कराने का आश्वासन दिया गया था। तबसे अब तक राह ताक रहे कि कब आवास बनेगा।
शशिकांत व उनकी पत्नी कला देवी भी क्षतिग्रस्त घर में जीवन व्यतीत कर रहीं हैं। कलादेवी का कहना है कि घर में कई जगहों पर दरारें पड़ी हैं। दूसरी व्यवस्था न होने से मजबूरन टूटे-फूटे घर में रहना पड़ रहा है।
