उरई। धोखाधड़ी कर कंपनी के नाम से पैसे लेने के मामले में दोष सिद्ध होने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट महेंद्र कुमार रावत ने दो दोषियों को सात-सात साल की कैद की सजा सुनाई। साथ ही 20-20 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। दोनों आरोपी अलग-अलग मामलों में दस साल से जेल में बंद हैं।
अभियोजन अधिकारी शैलेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला चंद्रनगर निवासी सरबती देवी ने 21 जुलाई 2012 को पुलिस को तहरीर दी थी। इसमें बताया था कि उनका बेटा कपिल चिटफंड कंपनी में पॉलिसी जमा करने का काम करता था। पॉलिसी खुलवाने पर कमीशन मिलता था। उसी में उसने भी करीब पांच लाख रुपये फिक्स कर दिए थे।
चिटफंड कंपनी ने न तो उसके पैसे दिए और न बेटे का कमीशन मिला। अचानक कंपनी भाग गई। इसी तरह कोंच कोतवाली कस्बा महंतनगर निवासी भगत सिंह ने भी पुलिस को 8 जुलाई 2013 को तहरीर देकर बताया था कि उन्होंने भी चिटफंड कंपनी में रुपये देकर पॉलिसी खुलवाई थी। चिटफंड कंपनी के अमनदीप निवासी द्वारिका मोड़ नई दिल्ली व सहारनपुर मध्य प्रदेश निवासी करुणेश शर्मा ने जाली दस्तावेज को असली दस्तावेज के रूप में तैयार कर दे दिए थे, जिसमें पैसे का कोई पता नहीं चल पा रहा था।
पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित फर्जी दस्तावेज तैयार करने के मामले में रिपोर्ट दर्ज कर न्यायालय में 22 जनवरी 2016 को चार्जशीट दाखिल कर दी। शुक्रवार को सुनवाई पूरी हुई। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के बीच जिरह, गवाहों के बयान सुनने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट महेंद्र कुमार रावत ने दोनों आरोपियों को फर्जी दस्तावेज तैयार करने व धोखाधड़ी कर रुपये लेने के मामले में दोषी पाते हुए सात-सात साल की कारावास बीस हजार रुपये जुर्माना लगाया है। अभियोजन अधिकारी शैलेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि इसके पहले भी इन दोनों आरोपियों को सजा हो चुकी है। उनके खिलाफ 24 से अधिक मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं।
