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बांदा। भवन निर्माण के लिए बिजली कनेक्शन के लिए किए गए ऑनलाइन आवेदन पर जेई और एसडीओ द्वारा रुपये की मांग की गई। उपभोक्ता द्वारा शिकायत करने पर मुख्य अभियंता ने जांच कराई तो जेई, एसडीओ दोषी पाए गए। जबकि जांच करने वाले अधिशासी अभियंता ने उपभोक्ता का कनेक्शन नहीं कराया। इस पर उपभोक्ता ने तीनों बिजली अधिकारियों के खिलाफ छल व धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई है।

शहर कोतवाली क्षेत्र के सिविल लाइन निवासी विवेक कुमार त्रिपाठी ने कोतवाली में दी तहरीर में बताया कि उसने बरगहनी गांव में भवन निर्माण में बिजली कनेक्शन के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। इसमें जेई रविकांत अनुरागी ने 50,281 रुपये का स्टीमेट बना दिया और अपलोड करने के लिए पैसे की मांग की। जिस पर उपभोक्ता ने डीएम और बिजली विभाग के अधिकारियों से शिकायत कर दी।

आरोप है कि शिकायत से नाराज एसडीओ देवव्रत आर्य व जेई रविकांत अनुरागी ने दूसरा स्टीमेट 83,846 रुपये का बना दिया। इस पर उपभोक्ता ने दोबारा शिकायत की। जिस पर दोनों अधिकारियों ने तकनीकी मामला बताकर अधिकारियों को गुमराह करने का प्रयास किया। उपभोक्ता ने थक हार कर मुख्य अभियंता से शिकायत की। उन्होंने इस मामले की जांच अधीक्षण अभियंता अखिलेश सिंह व अधिशासी अभियंता प्रकाश देव से जांच कराई तो जांच में एसडीओ देवव्रत आर्य व जेई रविकांत अनुरागी दोषी पाए गए।

जिस पर मुख्य अभियंता सुनील कपूर ने उपभोक्ता को सिंगल पोल पर 16 केवीए का परिवर्तक लगाकर तीन दिन में बिजली कनेक्शन देने का आदेश एक्सईएन प्रकाश देव को दिया था। आरोप है कि इस आदेश के बाद भी एक्सईएन, एसडीओ, जेई ने जानबूझकर कनेक्शन नहीं कराया। कोतवाली प्रभारी अनूप दुबे ने बताया कि उपभोक्ता की तहरीर पर तीनों बिजली अधिकारियों के खिलाफ कोतवाली नगर में धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की गई है।



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