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अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। जिला कारागार में बंदी औषधीय पौधों की खेती करेंगे। कारागार के भीतर औषधी वाटिका बनाने का काम शुरू हो गया है। इसमें वन तुलसी, शतावर, अश्वगंधा, जराकुश, कालमेघ जैसे औषधीय महत्व के पौधे लगाए जा रहे हैं। जेल अफसरों का कहना है कि इसके माध्यम से बंदियों को जैविक एवं औषधी पौधे की खेती के बारे में भी बताया जा रहा है। कारागार से निकलने के बाद वह इसकी मदद से जीविकोपार्जन भी कर सकेंगे।

कारागार के भीतर इस समय कुल करीब 1253 बंदी हैं। इनमें से 27 विचाराधीन हैं। इनकी मदद से जेल प्रशासन अपनी कृषि भूमि पर खास तौर से सब्जियां, अनाज आदि का उत्पादन करता है लेकिन, अब औषधीय एवं जैविक खेती भी कृषि फार्म पर कराई जाएगी। इसके लिए बंदियों को खास तौर से प्रशिक्षित किया गया है। जेल अफसरों का कहना है कि कृषि फर्म में वन तुलसी, शतावर, अश्वगंधा, जराकुश एवं कालमेघ को उत्पादन के लिए चुना गया है। उपयोगी होने पर इसका उत्पादन भी बढ़ाया जाएगा। कृषि फार्म में इसका उत्पादन पूरी तरह से जैविक रीति से किया जाएगा। वरिष्ठ जेल अधीक्षक विनोद कुमार के मुताबिक कारागार के भीतर इन्हीं पौधों की वाटिका भी तैयार की गई है। इसका मकसद बंदियों को इसका व्यवसायिक महत्व बताना है। जिससे वह इसके जरिए अपना जीविकोपार्जन कर सकेें।



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