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अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। सिंचाई विभाग में इन दिनों करीब 40 साल पुरानी फाइल तलाशी जा रही हैं। इसके लिए कर्मचारियों की अलग से ड्यूटी लगाई गई है। कर्मचारी पुराने दस्तावेजों को खंगालने में जुटे हैं। इस तलाशी अभियान के पीछे कुछ दिन पहले शासन से आया एक आदेश है। 4 नवंबर को सिंचाई विभाग के विभागाध्यक्ष की ओर से जारी आदेश में उन अभियंताओं के नाम बताने को कहा है जिससे महकमे को करीब 48 लाख रुपये की चपत सहनी पड़ी।

दरअसल, चालीस साल पुराना एक मामला सिंचाई विभाग के अफसरों के गले की फांस बना हुआ है। वर्ष 1983 में सिंचाई विभाग ने पहाड़ी डैम में राठ निवासी ठेकेदार राम स्नेही राजपूत से मिट्टी भरवाने का काम कराया था। विभाग ने ठेकेदार को कुछ रकम का भुगतान कर दिया लेकिन, बकाया छह लाख रुपया नहीं दिया। इसके बाद मामला मध्यस्थता न्यायालय में चला गया। वर्ष 2023 में वाणिज्यिक न्यायालय ने राम स्नेही के पक्ष को सही मानते हुए भुगतान का आदेश दे दिया। इस आदेश के बाद शासन से खास तौर से अलग से बजट जारी करना पड़ा। अब शासन इस मामले में जिम्मेदार अभियंताओं की जवाबदेही तय करने के मूड में है। शासन ने पत्र भेजकर वर्ष 1983 में यहां तैनात रहे अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता एवं अवर अभियंता के नाम भेजने को कहा है। अब यह धनराशि इन अभियंताओं से वसूलने की बात कही है। सपरार प्रखंड के अधिशाषी अभियंता अजय भारती का कहना है कि शासन से मिले पत्र के मुताबिक पुरानी फाइलें मंगवाई गई हैं।



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