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उरई। दीवाली के पर्व पर जमकर खरीदारी हुई तो घरों को सजाने के लिए लोगों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। दिन भर खरीदारी के बाद देर रात तक पूजा पाठ और आतिशबाजी हुई। जिससे चारों तरह का नजारा रंगीन दिखा। बच्चों ने पटाखों संग तो बड़ों ने एक दूसरे को शुभकामनाएं देकर दिवाली की खुशी जाहिर की। टिमटिमातें दीप औ संतरंगी आसमान से पहले बाजार की रौनक देर रात तक रही। मिष्ठान की दुकानें आधी रात तक खुली रहीं। लोगों ने शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी-गणेश की पूजा अर्चना कर हस्तनिर्मित दीयों को अधिक तरजीह दी।

धनतेरस से शुरू हुआ रोशनी का पर्व दीपावली को अपने चरम पर था। खुशी, उल्लास और प्रकाश का पर्व दीपावली नगर व ग्रामीण क्षेत्र में धूमधाम से मनाया गया। दीपावली के पर्व पर लोग उत्साह से सराबोर नजर आए। बाजार में रौनक बड़ी दिवाली को भी कम नहीं हुई। जो बाजार घंटाघर तक सीमित था। दिवाली की सुबह शहीद भगत सिंह चौराहे से लेकर पीलीकोठी तक पहुंज गया। जिसमें मोमबत्ती,पूजा-पाठ के सामान,झालर की दुकानों ने बढ़ोत्तरी हुई। शाम होते-होते सामानों के दामों में गिरावट होना भी शुरु हो गई। जो नमकीन 140 रुपये किलो थी वह 120 पहुंच गई। दीया 30 के बीस मिल रहे थे। 25 मिलने लगे। जो सामान त्योहारी सीजन का था। दुकानदारों ने उसे बेचने के लिए जल्दबाजी दिखाई। सुबह से ही महिलाओं एवं युवतियों के साथ बच्चों ने अपने घरों एवं व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में झालर, फूल से सजावट की देर शाम होने पर दीये मोमबत्ती आदि को जला कर रोशनी की।

मोहल्ले में विभिन्न जगहों पर आकर्षक रंगोलियां बनाईं। कुछ लोगों ने घर के बाहर रंगोली बनाई। जिसे दीये से जगमगा दिया। किसी ने ओम, स्वास्तिक जैसे मंगल प्रतीकों में रंग भरा तो किसी ने प्रथम पूज्य गणेश व धन व लक्ष्मी के चित्रों को रंगोली में उकेरकर देवी लक्ष्मी को अपने घर व प्रतिष्ठान पर आने का निमंत्रण दिया। शाम ढलते ही शुभ मुहूर्त में लोगों ने यश, वैभव और धन-धान्य की देवी लक्ष्मी, प्रथम पूज्य गणेश, वीणा वादिनी सरस्वती के साथ धन के देवता कुबेर की पूजा अर्चना कर अपने परिवार की सुख, समृद्धि की कामना की। इसके बाद लोगों ने बच्चों के साथ फुलझड़ी, अनार, चरखी, रेल, रॉकेट और लड़ी जैसी आतिशबाजी छोड़कर दीवाली का भरपूर लुत्फ उठाया। दीपों व झालरों से झिलमिल के साथ ही आतिशबाजी से निकलने वाली सतरंगी रोशनी से समूचा नगर रोशनी से नहा गया। इससे पूर्व सुबह चूरमा का प्रसाद व पकवान खाने के बाद लोग तैयार होकर अपने परिचितों को बधाई देने के लिए घर से निकल पड़े।

मंहगाई के बाबजूद खूब चली बारूद, मिठाइयों की हुई खूब बिक्री

कोंच। दीपावली पर लोगों ने नगर व क्षेत्र में गणेश की पूजा अर्चना कर उन्हें छप्पन भोग लगाए। उनके साथ भगवती लक्ष्मी के कोषाध्यक्ष कुबेर, व अन्य देवी देवताओं की भी पूजा कर सुख समृद्धि की कामना की गई। झालरें और दीपों की कतारें लोगों को आनंदित कर उनके मन में खुशियों का संचार कर रही थीं।

लोगों ने पारंपरिक उल्लास और श्रद्धा के साथ दीपावली मनाई। इस पर्व पर मिठाई का ज्यादा चलन होने के कारण मिठाई की दुकानें खूब सजीं और दिन भर लोगों का इन पर तांता लगा रहा, लोग घरों के लिए और अपने इष्ट मित्रों को उपहार में देने के लिए मिठाइयां खरीदते रहे। नए लकदक कपड़ों में सजे लोगों ने रात्रि में घरों और प्रतिष्ठानों में ऐश्वर्य और धन-धान्य की देवी भगवती लक्ष्मी और विघ्न विनाशक सुखों के दाता लम्बोदर एकदंत की मिट्टी की प्रतिमाओं को समुचित आसन देकर उनका विधि विधान से पूजन किया।

मिठाई की सजी दुकानों पर लगी रही खरीदारों की भीड़

जालौन। मिठाई की दुकानें रविवार को दीपावली के दिन सुबह सवेरे ही सज गई थीं। रंग बिरंगी स्वादिष्ट मिठाईयां खूब बिकीं। दोपहर तक ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों ने बाजार आकर मिठाई खरीदी जिसके बाद नगर के लोगों की भीड़ मिठाई की दुकानों पर देखी गई। मंहगाई के चलते इस वर्ष करीब 350 रुपए से लेकर 500 रुपए प्रति किलो तक मिठाई बेची गई। उधर, पर्व की शुभकामनाओं के साथ उपहार में देने के लिए मिठाई के साथ ही तमाम लोगों ने ड्राई फ्रूट्स और रेडीमेड सोनपापड़ी खरीदने को भी तवज्जो दी।

बच्चों संग मनाई दिवाली

कालपी। कोतवाली पुलिस ने रविवार को शेखपुर गुढा बच्चों और गरीबो के संग दीपावली का त्योहार मनाया। इस दौरान पुलिस ने सभी को मिठाई देकर उनके जीवन में भी त्योहार के रंग भरने की कोशिश की। अतिरिक्त निरीक्षक मुहम्मद अशरफ ने पुलिस बल के साथ पूर्व सांसद फूलन देवी के गांव में गरीबों और बच्चों के साथ त्योहार मनाया। उन्होंने गांव के गरीबो को मिठाई फल दिए और बच्चो को फुलझड़ी सहित उपहार दिए। ग्राम सचिवालय में ग्राम प्रधान रामबाबू निषाद की मौजूदगी में कार्यक्रम हुआ। (संवाद)

मौनिया व्रत करने वालों ने यमुना में स्नान किया

कालपी। मौनिया व्रत करने वाले युवाओ ने मोरपंख के साथ यमुना में स्नान किया। सोमवार को वह उपवास कर पांच से साथ गांवों का भ्रमण कर मौन व्रत की साधना को विराम देंगे। वैसे तो दीपावली पर मौन व्रत की शुरुआत कब और क्यो हुई थी इसका कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के कालिया नाग के मान मर्दन के बाद चरवाहो ने भूखे प्यासे रहकर उनका इंतजार किया था और उनके आने पर वह नाचे थे। इसी के चलते यह परंपरा पड़ी थी। तो कुछ लोग इस परंपरा को पशुपालकों से जोड़ते हैं। दीपावली के बाद क्षेत्र के सैकड़ो युवा एक जैसी वेशभूषा में क्षेत्र में भ्रमण कर शाम को घर लौटते हैं। जहां पर परिजन उनका व्रत खुलवाया जाता है।



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