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बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में रबी की बुआई के पीक समय में डीएपी का भंडार खाली हो गया है। ऐसे में किसानों के सामने खाद का संकट हो गया। एक-एक बोरी खाद के लिए बिक्री केंद्रों सहित सहकारी समितियों में मारामारी मची है।

मंडल में प्रतिवर्ष करीब 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में रबी की बुआई की जाती है। किसानों का कहना है कि रबी की बुआई अधिकतम 15 नवंबर तक हो जानी चाहिए, लेकिन समय पर डीएपी न मिलने से बुआई पिछड़ रही है। एक-एक बोरी खाद के लिए मारामारी मची है। मंडी समिति में किसान खाद के लिए डेरा डाले हैं। आलम यह है कि बिक्री केंद्र खुलता है 10 बजे, लेकिन किसान सुबह चार बजे से ही लाइन में लग जाते हैं। किसी कारणवश लाइन से हटने पर मौजूदगी दिखाने के लिए कोई सामान आदि रख देते हैं।

कमोवेश यहीं स्थिति सहकारी समितियों की है। खाद आते ही खत्म हो जाती है। तमाम किसान कई-कई दिन से खाद के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें खाद नहीं मिल रही है। किसानों का कहना है कि जरूरत पांच बोरी की है, लेकिन दो बोरी भी मिलनी मुश्किल है। खाद न मिलने से बुआई पिछड़ती जा रही है। जल्द खाद न मिली तो खेतों की नमी खत्म हो जाएगी और बोया गया अनाज अंकुरित नहीं होगा। बाजार में जो खाद मिल रही है, उनमें ज्यादातर नकली और मिलावटी है। निर्धारित दाम से अधिक पैसा भी लिया जा रहा है। ऐसे में बुआई का संकट खड़ा हो गया है।



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