उरई। बिहारी और पूर्वांचल के लोगों का चार दिवसीय छठ पूजा के दूसरे दिन शनिवार को खरना व्रत किया गया।
इस दिन महिलाएं दिन भर व्रत रखती हैं और शाम को कच्चे चूल्हे पर आम की लकड़ी का प्रयोग करके गाय के दूध, गुड़ और चावल से बनी खीर बनाती हैं। शाम को अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देकर प्रसाद के रूप में खीर, रोटी और केले का भोग लगातीं है। इसके बाद एकांत में इस प्रसाद को ग्रहण करती हैं।
इसके बाद आए हुए अतिथियों को प्रसाद वितरित किया जाता है। इस प्रसाद की खासियत होती है और जो लोग इस की महत्ता समझते हैं, वे इस प्रसाद को ग्रहण करने के लिए अपने आप उन घरों पर जाते हैं, जहां पर छठ पर्व मनाया जाता है, इस प्रसाद को ग्रहण करने के पश्चात 36 घंटे का निर्जला व्रत प्रारंभ हो जाता है।
छठ पूजा समिति के जिलाध्यक्ष संजय साहनी ने पर्व की महत्ता के बारे बताया कि छठ पूजा का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष इसकी सादगी पवित्रता और लोक पक्ष है। भक्ति और अध्यात्म से परिपूर्ण है, शास्त्रों से अलग यह जन सामान्य द्वारा अपने रीति-रिवाजों के रंगों में गढ़ी गई उपासना पद्धति है।
उन्होंने बताया कि पर्व को लेकर बच्चे से लेकर बूढ़ों तक में उत्साह है। 19 नवंबर को को शाम चार बजे रामकुंड पार्क में अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा की जाएगी और 20 नवंबर को सुबह चार बजे से रामकुंड पार्क में उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा की जाएगी।
