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चित्रकूट। हाईवे पर डंपर की टक्कर से स्कार्पियो सवार दो युवकों की मौत मामले में हंगामे के बीच दोपहर बाद एसपी ने थाना प्रभारी सूबेदार बिंद को हटा दिया। भाजपा के पूर्व सांसद के नेतृत्व में धरना दूसरे दिन शुक्रवार को भी जारी रहा। इससे 24 घंटे बाद दोनों मृतकों का पोस्टमार्टम कार्य शुरु हो पाया। शाम को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में दोनों का अंतिम संस्कार किया गया।

भरतकूप थाना क्षेत्र के कस्बे के पास तेज रफ्तार से जा रहे डंपर की टक्कर से स्कार्पियो सवार वीरा गांव निवासी हिमांशु मिश्रा(22) व जमालपुर बांदा निवासी रामभवन (24) की मौत हो गई थी। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने दोनों के शव जेसीबी से निकालकर अस्पताल न ले जाकर सीधे पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा दिया।

इसी बात को लेकर मृतकों के परिजन व भाजपा नेताओं ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाये कि पहले अस्पताल ले जाना चाहिए था ताकि डॉक्टर बताए कि दोनों जिंदा है या मृत हैं। आरोप था कि डंपर मालिक को पुलिस बचाने का प्रयास कर रही है। इस मामले में एसपी वृंदा शुक्ला ने थाने के एसआई इमरान को निलंबित कर मामले की जांच के आदेश दिए।

भाजपा के पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्र व पूर्व मंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय इससे संतुष्ट नहीं थे और थाना प्रभारी को निलंबित करने की मांग को लेकर नारेबाजी कर धरने पर बैठे रहे। पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। इनका कहना है कि खनिज माफियाओं से थाना प्रभारी अवैध वसूली करते हैं। इनकी शह पर ही खनिज सामग्री लदे वाहन अनियंत्रित गति से चलते हैं और बडे हादसे होते हैं।

शुक्रवार को दिन भर पोस्टमार्टम हाउस पुलिस छावनी में तब्दील रहा। भाजपा के पूर्व सांसद के साथ भाजयुमो के जिलाध्यक्ष हीरो मिश्रा, भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष दिव्या त्रिपाठी व कई अन्य कार्यकर्ता धरने पर बैठकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।

सीओ सिटी हर्ष पांडेय ने कई बार सभी को समझाने व कार्रवाई कराने का आश्वासन देते रहे लेकिन सभी बिना निलंबन के मानने के लिए तैयार नहीं थे। एसपी से बातचीत के बाद सीओ ने बताया कि भरतकूप थाना प्रभारी को वहां से हटाकर सीओ लाइन कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। इसका लिखित पत्र देने के बाद भाजपाई माने और पोस्टमार्टम की कार्रवाई हुई। शाम को पुलिस की मौजूदगी में दोनों शव का अंतिम संस्कार किया गया। तब जाकर पुलिस ने राहत की सांस ली।

चित्रकूट। हादसे के बाद मृतक हिमांशु के पिता राधाचरण मिश्रा ने आरोप लगाया कि पुलिस घटना के बाद दोनों युवकों को अस्पताल न ले जाकर सीधे पोस्टमार्टम हाउस ले गई। उनके परिजनों को भी पहले सूचना नहीं दी गई। बिना डॉक्टर की पुष्टि के पुलिसकर्मियों ने ही उन्हें मृत मान लिया जबकि हिमांशु के शरीर में ज्यादा चोट नहीं दिख रही थी।

धरने पर बैठे पूर्व सांसद ने आरोप लगाया कि थाना प्रभारी बालू व खनिज का काम करने वालों से अवैध वसूली करते हैं। इसका हिस्सा सभी अधिकारियों को मिलता है। इस कारण अनियंत्रित डंपर ट्रक सड़क पर दौड़ते हैं। इस संबंध में एसपी वृंदा शुक्ला ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे की रिकार्डिंग देखी गई है। दोनों के मृत होने की पुष्टि पर ही उन्हें पोस्टमार्टम हाउस भेजा गया। सीधे अस्पताल न ले जाने के मामले में थाना प्रभारी व दरोगा को हटाकर जांच बैठाई गई है।

चित्रकूट। शुक्रवार को पूर्व सांसद से जब पत्रकारों ने यही सवाल किया तो वह बेहद आक्रोशित दिखे, कहा कि सरकार उनके दल की है लेकिन कई अधिकारी बेलगाम हैं। अपने ही दल के कई जनप्रतिनिधियों का बिना नाम लिए कहा कि स्वार्थ सिद्ध वाले व फोटो खिंचाऊ नेताओं के कारण यह गड़बड़ है। उनके इस बयान को लेकर राजनैतिक गलियारे में कई मायने निकाले जा रहे हैं।

चित्रकूट। पोस्टमार्टम हाउस में मौजूद भाजपा के पूर्व सांसद भैरो प्रसाद के साथ पहले पूर्व मंत्री समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे। फिर कई लोगों के पास अज्ञात फोन आने लगे तो कई लोग वहां से खिसक गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक भाजपा के पदाधिकारी की पूर्व सांसद से धरना खत्म करने को लेकर जमकर नोंकझोंक हुई।



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