कृषि वैज्ञानिकों की आधुनिक कटिंग तकनीक फूल को ज्यादा दिनों तक रखेगी सुरक्षित
महाराष्ट्र से मार्गरेट फूल की प्रजाति पर भी किया शोध, ज्यादा मुनाफे के लिए बीज किसानों को दिए गए
संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। बुंदेलखंड के किसानों को फूलों की खेती से जोड़ने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने गेंदा फूल पर शोध किया है। जिसमें बंगाल के गेंदा की बुवाई के लिए आधुनिक कटिंग तकनीक को विकसित किया गया है। इसके साथ ही यहां महाराष्ट्र से मार्गरेट फूल की प्रजाति को भी लाया गया है। यह दोनों प्रजाति गर्मी के दिनों में किसानों को लाभ पहुंचाएंगी। इसके बीज किसानों को दिए गए हैं।
जिले में लगभग 4.3 हजार हेक्टेयर भूमि पर किसान गेंदा के फूल की खेती करते हैं। लेकिन, यह खेती सर्दी के मौसम में ही किसानों को लाभ देती है। जैसे ही हल्की गर्मी शुरू होती है यहां पैदा होने वाले फूल झुलसने लगते हैं, जिससे मार्केट में इनकी मांग भी नहीं रह जाती।
ऐसे में किसानों को लाभ देने के लिए केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने गेंदा की कटिंग को बुंदेलखंड में पड़ने वाली भीषण गर्मी के लिए विकसित किया है। अभी किसान गेंदा के बीज से फसल उगाते हैं, जिससे पौधे में देर से फूल आता है और टहनी से टूटने के बाद फूल मुरझाने लगता है। वहीं, कटिंग लगाने पर फूल जल्दी उगता है और इसका जीवन भी एक सप्ताह का होता है।
इसके अलावा कृषि वैज्ञानिकों ने महाराष्ट्र में पाई जाने वाली मार्गरेट प्रजाति के फूल पर भी शोध किया है। जिसका परिणाम यह निकला कि यह फूल बुंदेलखंड की गर्मी में भी ठीक से पनप पा रहा है। जब गर्मी में फूल की कोई प्रजाति यहां नहीं पनप पाती तब यह मार्गरेट का पौधा किसानों के लिए लाभ का सौदा होगा।
शोध में गेंदा के लिए बीज के स्थान पर कटिंग को महत्व दिया है। इसके परिणाम भी अच्छे आ रहे हैं। गर्मी में फूलों की उपलब्धता के लिए महाराष्ट्र के मार्गरेट को भी यहां की जलवायु के अनुसार विकसित कर लिया है। इसका पीला और सफेद रंग उपलब्ध होगा।
-डॉ. गौरव शर्मा, कृषि वैज्ञानिक
