
मुमुक्षु भवन
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ऐसी मान्यता है कि काशी में मृत्यु से मुक्ति मिलती है। धार्मिक मान्यता है की महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर चिता की अग्नि कभी बुझती नहीं है। इन्हीं मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए मणिकर्णिका घाट के निकट श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में मुमुक्षु भवन (बैद्यनाथ भवन) का भी निर्माण कराया गया है। यहां बीमार, आसक्त बुजुर्गों की सेवा नि:शुल्क की जाती है।
तीन मंजिला इस भवन में 40 बेड हैं। काशी में मुमुक्षु भवन का काफी पौराणिक महत्व है। जीवन का अंतिम समय काशी पुराधिपति भगवान शिव के धाम में उनके चरणों में व्यतीत करने को मिले तो लोग अपने आप को भाग्यशाली मानते हैं। मुमुक्षु भवन को संचालित करने वाली संस्था के मैनेजर कौमुदीकांत आमेटा ने बताया कि अभी तक 41 वृद्ध लोग यहां प्रवास कर चुके हैं।
जिसमें से तीन बुजुर्गों को मुक्ति मिली है। एक बार में करीब एक महीने तक रहने की व्यवस्था दी जाती है। काशीवास करने आए वृद्धजन यहां नियमित कीर्तन-भजन और बाबा के दर्शन करते हैं। तीन मंजिला ये इमारत 1161 वर्ग मीटर में बना है।
